बस्ती। अगर तेनुआ के बाबू साहब लोग पुरखों की इज्जत को मिटटी में मिलाने में लगे हैं, तो उसे कौन रोक पाएगा। न मीडिया रोक पाएगी और न पुलिस। अगर खाद चाहिए तो मांगिए, लेकिन खाद के नाम पर मां-बहन की गाली मत दीजिए और न मारपीट करने की धमकी ीर दिजीए। गाली देना और धमकी देना कानूनन अपराध माना जाता है। ऐसा ही एक मामला सहकारिता विभाग के एक सचिव के साथ में होने का सामने आया हैं, और इस मामले में एक बार फिर तेनुआ के बाबू साहब हरेंद्र पाल का सामने आया है। सरकारी कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि तेनुआ निवासी एक व्यक्ति ने सचिव को उनके घर पर फोन कर अश्लील गालियां दीं और मारपीट की धमकी दी। हैरानी तो तब हुई जब एसीडीओ के माध्यम से हुई बातचीत में भी कथित तौर पर उसकी जुबान पर लगाम नहीं लगी। आरोपित के विरुद्ध पहले से कई मुकदमे दर्ज होने की बात भी शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना-पत्र में कही है। अब पीड़ित सचिव ने पुलिस का दरवाजा खटखटाते हुए प्राथमिकी दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

ग्राम एवं पोस्ट ठोकवा निवासी अरुणेश पाण्डेय सहकारिता विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास चार-पांच समितियों का प्रभार होने के साथ धान खरीद का भी महत्वपूर्ण दायित्व है। प्रार्थना-पत्र के मुताबिक तीन नवंबर को वह अपने परिवार के साथ घर पर मौजूद थे। इसी दौरान तेनुआ निवासी हरेन्द्र पाल पुत्र भैरव पाल ने खाद उपलब्ध कराने के संबंध में फोन किया। आरोप है कि बातचीत के दौरान हरेन्द्र पाल ने अचानक मां-बहन और बेटी को लेकर बेहद अशोभनीय गालियां देनी शुरू कर दीं। विरोध करने पर मारपीट की धमकी भी दी। परिवार के सामने विवाद बढ़ने से बचने के लिए सचिव ने उस समय संयम बरता। मामला यहीं नहीं रुका। धान खरीद के संबंध में जिलाधिकारी की बैठक में जाने के दौरान अपर जिलाधिकारी का फोन आया। उन्होंने बताया कि हरेन्द्र पाल लाइन पर हैं और उन्हें खाद चाहिए। सचिव ने पहले हुई बातचीत की जानकारी दी तो आरोप है कि हरेन्द्र पाल ने इस दौरान भी गाली-गलौज और मारपीट की धमकी दी। प्रार्थना-पत्र में अपर सहकारी अधिकारी, सदर के फोन पर हुई बातचीत के दौरान भी इसी तरह अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है। सचिव ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि हरेन्द्र पाल का पूर्व में भी लोगों के साथ दबंगईपूर्ण व्यवहार रहा है तथा उसके विरुद्ध थाना लालगंज में विभिन्न धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। यदि यह मामला सही है तो पुलिस के लिए आरोपित के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और वर्तमान शिकायत की गंभीरता से जांच करना भी महत्वपूर्ण होगा। सचिव का कहना है कि संबंधित बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग उनके पास सुरक्षित है, जिसे जांच के दौरान पुलिस को उपलब्ध कराया जाएगा। सचिव ने आशंका जताई है कि लगातार मिल रही धमकियों से उनके और परिवार के सामने सुरक्षा का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने प्रभारी निरीक्षक लालगंज से मामले की निष्पक्ष जांच कर प्राथमिकी दर्ज करने, कॉल रिकॉर्डिंग सहित उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करने और आरोपित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है। अब सवाल यह है कि खाद जैसी आवश्यक वस्तु की मांग के नाम पर सरकारी कर्मचारियों को धमकाने और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने के आरोपों पर पुलिस कितनी गंभीरता से कार्रवाई करती है।