बस्ती। आज जब प्रदेश की जनता बसपा, भाजपा और सपा के सरकारों के कामकाज की तुलना करती है, तो वह बसपा को भाजपा और सपा के मुकाबले अधिक नंबर देना चाहती। इसी लिए पीड़ित जनता की ओर से यह आवाज उठ रही है, कि हम्हें योगी ओैर अखिलेश नहीं बल्कि मायावती चाहिए। यह आवाज इस लिए उठ रही है, क्यों कि प्रदेश की जनता को एक ऐसा शासक चाहिए, जो जनता के सामने मौके पर भ्रष्ट अधिकारियों को सजा दे सके।

कुदरहा ब्लॉक के ग्राम अईलिया को कौन भूल पाया होगा, जहां पर मंच से ही मायावती ने तत्कालीन दो सीडीओ को खड़े-खड़े निलंबित कर दिया था। प्रदेश की जनता को ‘नायक’ फिल्म जैसा सीएम चाहिए। ऐसा सीएम चाहिए जो अफसरों को नियम कानून से काम करना सीखा सके, आम जनता को तहसीलों और थानों के षोषण और अत्याचार से बचा सके। अफसरों को कार्यालयों में समय से बैठना सीखा सके, फरियादियों को गुलामों की तरह हाथ जोड़कर खड़ा रहने के बजाए उन्हें सम्मान के साथ कुर्सी पर बैठाना सीखा सके। यही कारण हैं, कि प्रदेष की जनता बेलाम हो चुके अफसषाहों की तानाशाही और उनके भ्रष्टाचार से मुक्त होना चाहती है। कहना गलत नहीं होगा कि प्रदेश की जनता बसपा की मायावती के हाथों में प्रदेश की बागडोर देखना चाहती है। वर्तमान को देखते हुए मायावती अभी कुछ करती और कहती हुई नहीं दिखाई दे रही है। लेकिन अगर इन्होंने मन बना लिया और वोटरों को सहेज लिया, और जिस तरह इन्होंने 2007 में सोषल इंजीनियरिगं को साधा था, और अपने वोट बैंक को बचाया था, अगर वही फारमूला अपना लिया तो मायावती को 2027 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने से कोई रोक नहीं सकता। अगर मायावती ने 2027 के चुनाव को ‘करो या मरो’ की तरह लिया तो सफलता मिलने की संभावना अधिक रहेगी। क्यों कि बसपा का वोटर और इसके कैडर मायावती को मुख्यमंत्री बनाने के लिए आतुर दिख रहे है। मायावती और उनकी पार्टी के लोगों की यह नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है, कि प्रदेश की जनता को एक सुषासन सरकार दें। यहां पर जनता मायावती को पूरी तरह क्लीन चिट नहीं दे रही है, कौन भूल सकता एनएचआरएम और पत्थर घोटाले को। मायावती की मांग इस लिए हो रही है, क्यों कि जनता भाजपा और सपा दोनों की सरकारों के कार्यकाल को दुख चुकी है। चूंकि मायावती को खोने का डर नहीं हैं, और जिसे खोने का या भी सत्ता जाने का डर रहता है, वह जमकर लड़ सकता है। देखना है, कि मायावती कैसे फिर से शून्य से शिखर तक पहुंचती है।

प्रदेश की जनता को एक ऐसा प्रदेश का मुखिया चाहिए, जिसके पास निर्णय लेने की क्षमता हो, और जो किसी की कठपुतली बनकर न रहे। भाई-भतीजावाद को बढ़ावा और आराजकता का माहौल पैदा करने वाले पार्टी के सीएम भी प्रदेश की जनता को नहीं चाहिए। ऐसी पार्टी का सीएम भी नहीं चाहिए, जो एक विषेष वर्ग के खिलाफ ही कार्रवाई करे, और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करें, जनता को ऐसा मुख्यमंत्री चाहिए, जिसे अपने भ्रष्ट मंत्री तक को हटाने में जरा भी हिचक न हो। मायावती के लिए सोशल इंजीनियरिगं पर अधिक काम करने की आवष्कता हैं, ऐसा सोशल इंजीनियरिगं जिसमें सभी वगों के लोगों को उनकी जनसंख्या कें आधार पर टिकट देना चाहिए। जिस तरह कांशीराम ने 1996 में कांग्रेस से गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, ठीक उसी तरह अगर मायावती भी कांग्रेस से गठबंधन कर 2027 का चुनाव लड़ती है, तो सर्वसमाज के साथ-साथ मुस्लिम वोटों का बसपा के साथ ध्रुवीकरण हो सकता है। इससे मायावती सरकार बनाने के करीब पहुंच सकती है। सपा से समझौता कर सत्ता में आ सकती हैं, लेकिन यहां पर सबसे बड़ा सकंट सीएम की कुर्सी को लेकर होगा, क्यों कि दोनों को सीएम की कुर्सी चाहिए। अगर मायावती के साथ राजभर, निषाद, ओबैसी, अनुप्रिया पटेल या पल्लवी पटेल और स्वामी प्रसाद मौर्या की पार्टी आ जाएगंी तो बसपा सरकार बना सकती है। यह ऐसी पार्टियां हैं, जो अधिक सीटें भी समझौते में नहीं मांगेंगी, एक-एक पार्टी ने अगर 25-25 सीट भी मांगा तो पांचों 100 में सिमट जाएगें, बाकी मायावती का। ओबीसी और एससी के लोगों के लिए नौकरी की संभावना बढ़ जाएगी।