बस्ती। पीएचसी कुदरहा के एमओआईसी डा. अष्वनी यादव और एएनएम विेनोदा सिंह क्षेत्र के गरीब गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चों की मौत का कारण बनती जा रही है। सवाल उठ रहा है, जब विनोदा सिंह अधिकारी बन गई, तो कैसे उन्हें डिलीवरी प्वाइंट दिया गया। एमओआईसी और एएनएम दोनों की कार्यशेली मरीज हित विरोधी है। क्षेत्र वाले कहते हैं, कि इन दोनों 50 फीसद कमीशन पर सरकारी नौकरी कर रही है, एमओआईसी मेडिकल वाले से बाहरी दवा लिखने के नाम वा 50 फीसद कमीशन लेते हैं, तो एएनएम अवैध रुप से संचालित हो रहें सिटी लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर और आकृति डायग्नोस्टिक सेंटर से अल्टासाउंड के नाम पर 50 फीसद कमीशन लेती है। दोनों सेंटर पर अप्रशिक्षित अल्टासाउंड कर रहे हैं, कभी बच्चा जिंदा होना बताते हैं, और जब दुबारा जांच करते हैं, तो बच्चा मरा हुआ जानते हैं, लेकिन मरीज को रिपोर्ट नहीं देते, और हयर सेंटर यानि कैली को रेफर कर देता है, जहां पर आपरेशन से बच्चा मरा हुआ पैदा होता, जबकि बच्चा दस दिन पहले ही मर गया था, लेकिन एएनएम विनोदा सिंह और सिटी लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर के मालिक शाह आलम एवं बिना डिग्री के अल्टासाउंड करने वाले रिशभ वाले बच्चे को जिंदा बताते रहें, ताकि जितनी बार अल्टासाउंड हो उसका पैसा मिल सके। जिस तरह मरे हुए बच्चे के नाम पर एएनएम और सिटी लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर वाले जेबें भर रहे हैं, उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। जो लोग पैसे के लिए किसी गरीब की जान लेते हैं, उन्हें समाज से बाहर कर देना चाहिए। क्षेत्र की जनता एमओआईसी, एएनएम और सिटी लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर वाले को कम और इसके नोडल डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी को एवं सीएमओ को अधिक जिम्मेदार मानती है। सवाल उठ रहा है, कि कैसे बिना डिग्री के अल्टासाउंड संचालित हो रहे हैं, और जब बिना डिग्री वाले जांच करेगें तो बच्चे को मरा और जिंदा दिखाएगें ही।

इसकी शिकायत सीएमओ कार्यालय के भ्रष्टाचार के खिलाफ निरंतर आवाज उठाने वाले क्षेत्र के एवं भाकियू भानु गुट के जिला उपाध्यक्ष उमेश गोस्वामी ने इसकी शिकायत डीएम से करते हुए। अवैध डायग्नोस्टिक सेंटरों पर कार्रवाई की मांग की है।

भारतीय किसान यूनियन (भानु) के जिला उपाध्यक्ष उमेश गोस्वामी ने कुदरहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास संचालित अवैध डायग्नोस्टिक सेंटरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जिलाधिकारी को सौंपे गए एक शिकायती पत्र में उन्होंने सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर और आकृति डायग्नोस्टिक सेंटर पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल सील करने की मांग की है। शिकायती पत्र के अनुसार, बहादुरपुर ब्लॉक के रामपुर गांव निवासी ओमप्रकाश यादव ने पूर्व में डीएम और सीएमओ से शिकायत की थी कि उक्त अल्ट्रासाउंड सेंटर द्वारा गलत रिपोर्ट दिए जाने के कारण एक नवजात शिशु की पेट में ही मृत्यु हो गई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने दो सदस्यीय जांच टीम गठित की थी।

जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल पत्र में आरोप लगाया गया है कि इन केंद्रों का संचालन कथित तौर पर उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी के संरक्षण में किया जा रहा है। आश्चर्यजनक रूप से, जांच टीम का अध्यक्ष भी डॉ. ए.के. चौधरी को ही बनाया गया है। उमेश गोस्वामी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जिस अधिकारी पर संरक्षण देने का आरोप है, वही जांच कैसे कर सकता है? उन्होंने डॉ. ए.के. चौधरी को जांच प्रक्रिया से हटाने की मांग की है। भाकियू (भानु) ने मांग की है कि बस्ती मेडिकल कॉलेज या महिला अस्पताल के अपर निदेशक चिकित्सा के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाए। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जनपद में ऐसे सैकड़ों अवैध केंद्र संचालित हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि जनहित में इन केंद्रों को सील कर पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए, अन्यथा वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उधर जब कुदरहा के ब्लाक प्रमुख अनिल दूबे को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए एमओआईसी, एएनएम और सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ लिखने को कहा तो कहने लगे कि कल ही स्वास्थ्य के अधिकारियों की बैठक बुलाता हूं।