बस्ती। पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी भले ही बस्ती की जनता का दिल नहीं जीत पाए, लेकिन इन्हांेने मोदी, शाह और असम के मुख्यमंत्री का दिल और विष्वास अवष्य जीत लिया। वैसे यह पहले से ही मोदी और शाह के दिल के करीब थे, लेकिन असम की जीत के बाद और यह और करीब हो गएं है। इन्हें मोदी और असम में अगर भाजपा की सरकार तीसरी बार बनी है, तो इसमंे असम प्रभारी हरीश द्विवेदी और बस्ती से गई उनकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। हरीशजी के इस टीम के बारे में कहा जाता है, कि यह टीम जहां भी जाती है, जीत कर ही आती है, इससे पहले यह टीम बनारस और दिल्ली गई, वहां जीत कर आई, और अब असम फतह कर इस टीम ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और लगन से किया गया कोई कार्य असफल नहीं होता। इन लोगों की वफादारी न सिर्फ पार्टी के प्रति हैं, बल्कि हरीश द्विवेदी के प्रति भी है। युवाओं की इस टीम में कुछ करने और आगे बढ़ने की जो ललक और जोश हैं, उसे देख कहा जा सकता है, कि अगर टीम के सदस्यों को अवसर मिलता है, तो वह भी हरीश द्विवेदी की राह पर चलकर बहुत कुछ हासिल कर सकते है। राजनीति की उंचाईयों को छू सकते है। अपने सपने को साकार कर सकते है। ऐसी समर्पण की भावना बहुत कम लोगों में दिखाई देती है। कहा भी जाता है, कि टीम के सदस्यों को उनकी मेहनत का फल भी मिलना चाहिए। टीम में विधा मणि सिंह, ब्रहृमदेवा उर्फ देवा, अरविंद पाल, सुनील सिंह, पिंटू बाबा और सुरेंद्र चौधरी सहित अन्य शामिल रहे है। इस टीम ने 15 दिन तक रात दिन एक कर दिया। इस टीम को जो भी कार्य दिया गया, उसे पूरा कर ही वापस लौटते थे। टीम के लोगों का कहना है, कि असम की जीत में केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा किए गए विकास की जीत है। टीम के सदस्यों का घर-घर जाकर जनसम्पर्क करना और उन लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करना, जो कभी निकलती ही नहीं थी, उन्हें समझाया गया, कि भाजपा सरकार में आप लोग सुरक्षित और आप लोगों का विकास छिपा है। उत्तर-प्रदेश और बिहार के बहुल वाले इलाकों पर सबसे अधिक फोकस किया गया। युवाओं और व्यापारी वर्ग के लोगों के नियमित बैठके की गई, और उन्हें मोदी और शाह की ओर से असम में किए जा रहे विकास कार्यो की जानकारी दी। अन्य प्रदेशों की अपेक्षा असम में महिलाओं का सक्रिय राजनीति में बहुत बड़ा योगदान रहता है। बताया गया कि मोदी और षाह ने इस पिछड़े राज्य में जो विकास किया, वह अभी तक किसी भी सरकार ने नहीं किया, ऐसी-ऐसी योजनाएं लागू की गई, जिसका लाभ असम की जनता को मिला, जहां पर जाने के लिए कभी 20-20 घंटे लगते थे, वहां जाने में अब तीन घंटा लगता है। गांवों में सड़कों का जाल बिछाया। टीम के सदस्यों का कहना है, कि जिस तरह हरीशजी ने प्रत्याशी चयन से लेकर नाराज लोगों को मनाने और उन्हें एक साथ मंच में लाने में जो भूमिका निभाया, उसी की बदौलत असम में भाजपा का तीसरी बार झंडा लहराया। अपनी रणनीति से हरीषजी ने गुटबाजी को पूरी तरह समाप्त कर दिया। यह सही है, कि इस जीत से हरीश द्विवेदी का राजनैतिक कद बढ़ा है। हो सकता है, कि इन्हें इसका पुरस्कार भी किसी न किसी रुप में मिल जाए।
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