बस्ती। कहा भी जाता है, कि अगर प्रशासन चाह जाए तो क्या नहीं हो सकता? बस चाहने भर की देरी है। अगर इसका सच देखना हो तो सदर तहसील के चर्चित ग्राम कड़रखास चले जाइए। यहां पर मंदिर और मस्जिद के जमीन का विवाद 72 साल यानि 1954 से चला आ रहा है, इसे लेकर गांव में रह-रहकर दो पक्षों में तनाव की स्थित खड़ी हो जाती है, जिसके लिए प्रशासन को बड़ी मशक्कत और मेहनत करनी पड़ती। जब यह मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा तो 1996 में एक फैसला हुआ, जिसमें दोनों पक्षों को आधा-आधा यानि 16 बीघा जमीन में से आठ बीघा मंदिर और आठ बीघा मस्जिद के नाम करने का निर्णय हुआ। इस निर्णय से दोनों पक्षों ने सहमति जताया। इधर पिछले एक माह से प्रषासन की टीम गांव लगातार जा रही है। दबाव बना रही है, कि जो आधी जमीन मस्जिद को मिला उसे छोड़ दो। जब पक्षकारों ने नहीं माना तो प्रषासन की ओर से कहा गया कि गांव में जो मदरसा और मस्जिद बना है, वह सरकारी जमीन पर बना है, अगर आप लोगों ने नहीं माना तो जमीन को नियमानुसार खाली करवा दिया जाएगा। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया जिन कुछ पक्षकारों ने भी बंजर की सरकारी जमीन पर मकान बनवा लिया, उसपर बुलडोजर चलवा दिया जाएगा। पक्षकारों को जब प्रशासन ने उनकी असलियत बताया तो उनकी समझ में आ गया, इस पर दोनों पक्षों की ओर से एक समझौता हुआ, जिसमें चार बीघा मस्जिद और 12 बीघा मंदिर के नाम होने की सहमति बनी। गांव के कुछ जानकरों का कहना है, कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन पैमाईश करवाकर आधा-आधा हिस्सा कर दिया होता तो कोई विवाद ही नहीं होता। विरोध करने से पहले प़क्षकारों से सोचना और समझना चाहिए था, कि जब वह लोग खुद सरकारी जमीन पर मकान, मस्जिद और मदरसा बनवा लिया है, तो अगर विरोध करेगें तो उन्हें भी नुकसान हो सकता है। प्रषासन ने यह भी समझाने का प्रयास किया कि मस्जिद को आठ बीघा जमीन मिलना है, उसे प्रशासन किसी अन्य स्थान पर दिलवा देगा, लेकिन नहीं माने, माने कब जब प्रशासन ने उन लोगों को आईना दिखाया। प्रशासन चार बीघा जमीन को भी पक्षकारों को किसी अन्य स्थान पर देने को तैयार है।
- Loading weather...
- |
- Last Update 04 Apr, 02:11 AM
- |
- |
- खबरें हटके
- |
- ताज़ा खबर
- |
- क्राइम
- |
- वायरल विडिओ
- |
- वीडियो
- |
- + More
0 Comment