बस्ती। मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी के सामने रुधौली ब्लॉक की बैठक में भ्रष्टाचार की पोल जनप्रतिनिधियों के द्वारा जमकर खोली गई। बैठक एक तरह से भ्रष्टाचार बनाम विकास का अखाड़ा बन गया था। जनप्रतिनिधियों का गुस्सा इस तरह फूटा कि सभी दंग रह गए। आरोपों को देख लगता ही नहीं, कि इस ब्लॉक क्षेत्र में कोई काम ईमानदारी से हुआ होगा। जल निगम से लेकर कार्यालय और तत्कालीन बीडीओ तक को चपेट में ले लिया। प्रधान संघ अध्यक्ष आशुतोष मिश्रा “सोनू” ने भी बैठक में ब्लॉक कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठाकर सबको चौंका दिया। उन्होंने पूछा कि आखिर किस आधार पर सफाई कर्मियों से कार्यालय का काम कराया जा रहा है और ब्लॉक परिसर के सरकारी कमरों में निजी कर्मचारियों को रहने की अनुमति किसने दी। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लॉक कार्यालय में कई व्यवस्थाएं नियमों के विपरीत चल रही हैं और इस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। क्षेत्र पंचायत सदस्य राजकुमार पांडे ने सदन के बीच पूर्व बीडीओ योगेंद्र राम त्रिपाठी के कार्यकाल पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके समय में ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों की लगातार अनदेखी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्य बाधित रहे और जनप्रतिनिधियों को सम्मान तक नहीं मिला। राजकुमार पांडे ने सदन में निंदा प्रस्ताव रखने की बात कही, जिस पर कई लोगों ने सहमति जताई। उनके बयान के बाद सभागार में माहौल अचानक गर्म हो गया। वहीं ग्राम पंचायत पचारी के तुलसीराम ने जल निगम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गांवों में पाइपलाइन और खुदाई के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांवों की सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं, जिससे ग्रामीणों को रोज भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उनका आरोप था कि काम की गुणवत्ता बेहद खराब है और अधिकारी सिर्फ कागजों में विकास दिखाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। तुलसीराम ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बैठक में मौजूद कई अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी पूर्व बीडीओ के कार्यकाल को लेकर नाराजगी जताई। कुछ लोगों ने कहा कि जून 2025 में ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधानों को धरना तक देना पड़ा था क्योंकि विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके थे। यहां तक कहा गया कि पूर्व बीडीओ के तबादले के बाद कुछ लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई थी। हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जिन लोगों की “भ्रष्टाचार रूपी दाल” नहीं गल पा रही थी वही लोग सबसे ज्यादा खुश दिखाई दिए, जबकि ईमानदार छवि वाले जनप्रतिनिधियों में निराशा का माहौल था। प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों की बैठक उस समय पूरी तरह गरमा गई जब विकास कार्यों, भ्रष्टाचार, अव्यवस्थाओं और अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर जनप्रतिनिधियों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया। बैठक का उद्देश्य जहां विकास योजनाओं की समीक्षा और विभागीय जानकारी देना था, वहीं यह कार्यक्रम कई गंभीर आरोपों, तीखी बहस और सवालों के कारण चर्चा का केंद्र बन गया। विशिष्ट अतिथि पुष्करादित्य सिंह ने बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और जहां भी भ्रष्टाचार या अनियमितता की शिकायत मिलेगी वहां जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी। हालांकि बढ़ते विवाद और तीखे आरोपों के बीच खंड विकास अधिकारी अनिल कुमार यादव ने सफाई देते हुए कहा कि जो भी शिकायतें सामने आई हैं उनकी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजी जाएगी।