बस्ती। मामले को रफादफा करने के मामले में अब तक का सबसे बड़ा आफर का खुलासा हुआ है, दो करोड़ नकद का आफर दिया गया, फिर भी आफर को ठुकरा दिया गया। जिले में हैं, कोई ऐसा शिकायतकर्त्ता जो करोड़पति नहीं बनना चाहता, जो व्यक्ति करोड़पति नहीं बनना चाहता है, उसका नाम विष्णुदेव मिश्र है। बकौल इनके जब मेडिकल कालेज में 60 लाख के सामान में फर्जीवाड़ा की शिकायत की गई तो मुझे प्रधानाचार्य के द्वारा मामले को रफादफा करने के लिए दो करोड़ नकद और दो करोड़ का जीवनभर काम का आफर दिया, इतना बड़ा आफर इस लिए दिया गया, ताकि प्रधानाचार्य की नौकरी न जाए। यह आफर देने की बात किसी और ने नहीं बल्कि मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य ने शिकायतकर्त्ता विष्णुदेव मिश्र से कही। इसका खुलासा खुद मिश्रजी ने किया। यह आफर मेडिकल कालेज के उस कथित 60 लाख के कथित घोटाले को लेकर देने का दावा किया जा रहा है, जिसमें प्रधानाचार्य फंसते हुए पर दिया। कहा कि प्रधानाचार्य की ओर से पहले 25 लाख नकद और दो करोड़ का काम देने का आफर दिया गया, जब आफर को ठुकरा दिया तो एक करोड़ नकद और एक करोड़ का काम जीवनभर देने का आफर दिया, उसे भी ठुकरा दिया, कहा कि हमने प्रधानाचार्य से साफ कह दिया, कि मैं बिकाउ शिकायतकर्त्ता नहीं हूं, जो आप हम्हें खरीद लेगें। जहां पर हजार दो हजार में शिकायतकर्त्ताओं को बिकते देखा गया, वहीं पर अगर कोई चार करोड़ में भी नहीं बिकता तो बहुत बड़ी बात है। बकौल शिकायतकर्त्ता कोई ऐसा अधिकारी नहीं जहां पर उसने शिकायत न की हो, लेकिन उसकी कहीं भी नहीं सुनी हुई, वह लगभग एक साल से डीएम, कमिष्नर, मंत्री, डिप्टी सीएम से मिलकर जांच करवाने और कार्रवाई करने की कही, लेकिन अभी तक उसे कहीं से भी न्याय नहीं मिला, शिकायतें तो सभी ने सुनी, जांच और कार्रवाई का भरोसा भी दिया, जांच भी हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, अब वह मामले को लोकायुक्त के यहां ले गएं है। आप लोगों को भी कथित आफर की बात सुनकर हैरानी हो रही होगी।

वहीं पर मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डा. मनोज कुमार का कहना है, कि मेरे प्रधानाचार्य बनने से पहले विष्णु देव मिश्र कैली में ठेकापटटी का काम करते थे, लेकिन जब से जेम पोर्टल से खरीदारी शुरु हुई, तब से इन्हें काम मिलना बंद हो गया, कहते हैं, कि अब अगर एक रुपया का कोई भी सामान खरीदना होता है, तो उसे जेम पोर्टल के जरिए ही खरीदा जाता है। लेकिन मिश्राजी चाह रहे थे, कि हम्हें पहले जैसा ठेकापटटी मिलता रहे, कहा भी गया, कि अगर काम चाहिए तो जेम पोर्टल पर आना होगा। कहते हैं, कि मिश्राजी 2024 से ही खरीदारी में फर्जीवाड़ा की शिकायत करते आ रहे है। इनकी शिकायत पर अब तक जिला स्तरीय से लेकर महानिदेशक स्वास्थ्य स्तर से तीन-तीन जांचें हो चुकी है, लेकिन एक भी जांच में एक रुपये की भी अनियमितता नहीं पाई गई, सवाल करते हैं, कि अगर अनियमिता मिलती तो क्या कार्रवाई नहीं होती? कहते हैं, कि पहली जांच तत्कालीन डीएम वामसी साहब ने सीडीओ से करवाई, उसमें क्लीन चिट मिला, फिर डीएम की ओर से जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम से जांच करवाई, उसमें क्लीन चिट मिला, और अंतिम जांच महानिदेशक स्वास्थ्य की ओर कराई गई, जिसमें फाइनेंस कंटोलर सहित दो प्रदेष स्तर के अधिकारी रहे, चार दिन तक टीम जांच करती रही, लेकिन एक रुपये की गड़बड़ी नहीं मिली, यहां भी क्लीन चिट मिला। अब अगर इसके बाद भी कोई आरोप लगाता है, तो माना जाता है, कि आरोप किसी मकसद के लिए लगाया जा रहा है। जोर देकर कहते हैं, बस्ती का मेडिकल कालेज में कार्यो में पूरी पारदर्षिता रखी जाती है, आरोप तो काई भी किसी पर भी लगा सकता है। षासन भी यह देखता है, कि आरोप कौन लगा रहा है, अगर आरोप कोई ऐसा सामान्य व्यक्ति लगाता है, जिससे उसे मेडिकल कालेज से कोई लेना-देना नहीं तो षासन भी आरोपों को गंभीरता से लेता, लेकिन अगर यही आरोप किसी ठेकेदार के द्वारा लगाया जाता है, तो आरोप लगाने के पीछे की मंशा का पता चल जाता है।