हापुड़
भारतीय किसान यूनियन (बाबा) के कार्यालय पर
ट्रेड बिल को लेकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निर्देशानुसार एक महत्वपूर्ण पंचायत का आयोजन किया गया।
इस बैठक में अमेरिका द्वारा भारत पर थोपी जा रही व्यापारिक शर्तों (ट्रेड डील) पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई और इसके संभावित दुष्परिणामों को लेकर पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को जागरूक किया गया।
मध्यम वर्ग और सेब उत्पादकों पर मंडरा रहा संकट
पंचायत को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यदि यह ट्रेड डील मौजूदा शर्तों के साथ लागू होती है, तो इसका सबसे घातक प्रहार भारत के मध्यम वर्ग के किसानों और मजदूरों पर होगा।
संगठन ने विशेष रूप से सेब के आयात का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अमेरिका से सेब आने पर देश के लाखों एकड़ में सेब की खेती करने वाले भारतीय किसानों की आजीविका पूरी तरह तबाह हो जाएगी।
0% ड्यूटी नीति का कड़ा विरोध
बैठक में चर्चा का मुख्य केंद्र अमेरिका की वह नीति रही, जिसके तहत वह अपने उत्पादों को भारतीय बाजारों में खपाने के लिए 0% शुल्क (ड्यूटी) की मांग कर रहा है।
यूनियन का मानना है कि:
* इससे भारतीय किसानों के उत्पादों की कीमत गिर जाएगी।
* छोटे व्यापारियों और घरेलू उद्योगों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
* विदेशी कंपनियों का भारतीय बाजार पर एकाधिकार हो जाएगा।
" सरकार को देश के अन्नदाता और मजदूरों के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए हम किसी भी ऐसी नीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो हमारे किसानों की कमर तोड़ दे
> — प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन (बाबा)
आंदोलन की चेतावनी
पंचायत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि भारतीय किसान यूनियन (बाबा) ऐसी हर किसान-विरोधी और मजदूर-विरोधी नीति का पुरजोर विरोध करेगी।
संगठन ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इन घातक नीतियों पर लगाम नहीं लगाई गई और ट्रेड डील के फैसले को वापस नहीं लिया गया, तो संगठन देशव्यापी स्तर पर बड़ा आंदोलन छेड़ने को मजबूर होगा।
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