भारतीय संविधान को दरकिनार कर हम भारत के लोगों के अधिकार को कुचलकर सत्ता में बने रहने का प्रयास

संविधान,तिरंगे को न मानने वाले सत्ता में आकर लोकतंत्र में समानता के अधिकार वोट को कब्जे में किया

संविधान का मखौल उड़ता देख, रक्षक भी जिम्मेदार,नहीं निभाया फर्ज,इतिहास में होगा दर्ज

ओमप्रकाश गौतम
 गढ़मुक्तेश्वर:  गुलामी की जंजीरों से मुक्त करने के लिए अग्रेजों की यातना जुल्म जेलों में रहकर सहे और अपने प्राणों की कुर्बानी देकर देश को आजाद कराया था। आजाद देश में लोकतंत्र संविधान से चलाया जाता है। संविधान निर्माताओं ने सभी जाति और धर्मों को समानता का अधिकार दिया। संविधान समिति के चेयरमैन डॉ बीआर अम्बेडकर ने देश की तरक्की के लिए महिला पुरुषों को शिक्षा का अधिकार दिया भी गरीब हो या अमीर सबको एक वोट की ताकत दी जिससे सरकार बनाई जाती है। देश में मनुवादी सोच ने संविधान सहित तिरंगे का हमेशा विरोध कर अपना वर्वच्य रखने के प्रयास में रही।  सत्ता में बने रहने के लिए लोकतंत्र के चारों स्तंभ अपने अनुकूल बना लिए जो देश एकता अखंडता के लिए खतरा है।

देश के प्रधानमंत्री ने मेरी मां,तेरी मां कहकर सब् कुछ खत्म किया=
देश के प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरी मां की मिक्री कर गाली दी है।और जब राहुल गांधी को पप्पू बनाने,उसकी मां को काग्रेस की विधवा कहना, जर्सी कहना, पचास करोड़ की गर्ल फ्रेंड कहकर अब कुछ धूमिल ही नहीं संस्तुति की धज्जियां उड़ा दी। देश का चुनाव हो या राज्यों के चुनाव में मंगल सूत्र छीनना,हिंदू को खतरा बताकर भय भीत किया। यहां चरितार्थ होता है,,वो कत्ल भी करते है तो चर्चे नहीं होते हम आह भी भरते है तो होते है बदनाम,,

लोकतंत्र के रक्षक देखते रहे=
भारत का लोकतंत्र और संविधान दुनिया में सबसे मजबूत माना जाता है। लोकतंत्र के चारों स्तंभों को सत्ता ने अपने अनुकूल बना लिया। लोकतंत्र के रक्षक मूक बनकर देखते ही नहीं रहे बल्कि सत्ता के आधीन हो गए। देश के युवा बेरोजगार हुए वोट के अधिकार की चोरी हुई तो युवा सड़क पर आ गए। न्यूज चैनल के अलावा प्रिंट मीडिया ने भी सत्ता की बोली, बोली और युवाओं के बड़े विरोध अभियान को कोई जगह नहीं दी गई कैसी पारदर्शिता दिखाई। देश की सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचे तो वोट से वंचित करने पर अगले चुनाव में वोट दे देना कुठाराघात है। यह अब इतिहास में दर्ज होगा कि लोकतन्त्र की लड़ाई में न्यायपालिका भी अनुकूल हो गई। 
 
देश के संविधान और तिरंगे से नफरत,शपथ लेकर हुए सत्ता पर आसीन=
आरएसएस का देश की आजादी में कोई योगदान नहीं रहा। देश आजाद हुआ तो संविधान, और तिरंगा को नहीं माना लोकसभा के चुनाव 2024 में संविधान को बदलने के लिए 400 पार का नारा दिया। मगर जनता ने इनके मंसूबे पर पानी गैर दिया और सत्ता की ताकत के साथ वोट चोरी कर सत्ता में आ गए। कांठ की हांडी एक बार ही चढ़ पाती है। इन्होंने तो हिन्दू खतरे का भय दिखाकर सत्ता में आकर सामाजिक ढांचे की खिन्न भिन्न कर दिया। धर्म और जाति को बांटकर धर्म को भी नहीं बक्शा।