बस्ती। जिस नगर पंचायत भानपुर में 15 हजार मानदेय पाने वाला अविनाश मिश्र उर्फ मंचल के हाथ में दो लाख का आईफोन हो और वह 22 लाख की क्रेटा गाड़ी से चलता हो, और जिसकी महीने की आमदनी पांच लाख से उपर की हो, उस नगर पंचायत में भ्रष्टाचार की गंगा बहना लाजिमी है। खासबात यह है, कि यह बाबू सभी का चहेता हैं, नेता से लेकर ठेकेदार और अधिकारी तक इसके गुणगान करते हैं। अगर विधायक राजेंद्र चौधरी से पूछिए तो वह भी कहेगें कि बहुत अच्छा है, और अगर संजय प्रताप जायसवाल से पूछिए तो वह भी बाबू की तारीफ करते नजर आएगें, कहने को यह सबके खास हैं, लेकिन यह किसी के खास नहीं है। इनकी आमदनी एक आईएएस और पीसीएस अधिकारी से भी अधिक है। जिस बाबू को 15 हजार मानदेय मिलता हो, और वह महीने में तेल पर 18 हजार खर्च करता हो, वह कैसे ईमानदार हो सकता है? अगर ऐसे बेईमान बाबू की तारीफ नेता और ठेकेदार करते हैं, तो माना जाता है, कि बाबू के साथ वाले नेता और ठेकेदार भी बेईमान होंगें। भ्रष्ट बाबूओं की तारीफ भ्रष्ट लोग ही करते हैं, इस लिए करते हैं क्योंकि वह खुद भ्रष्टाचार में डूबे रहते हैं। इनके भ्रष्टाचार के प्रेम की गाथा भानपुर से लेकर मुख्यालय तक सुनाई जाती है, भ्रष्ट लोग इन्हें एक अच्छा मैनेजर कहते और मानते हैं, क्यों कि इन्होंने मैनेजमेंट में डिग्री जो ले रखी है। लोग कहते भी हैं, मैनेजर हो तो ‘मंचल’ जैसा, वाकई इनके टक्कर का पूरे जिले में और कोई मैनेजर नहीं होगा, जब भी इनकी शिकायत होती है, और इन्हें अन्य नगर पंचायत में भेजने की बाते होती है, तो नेता मंडली इसके प़क्ष में लगोंट खोलकर खड़े होतेे नजर आतें है। इनके महीने की आमदनी को देखते हुए कहा जा रहा है, कि इन्होंने इस आदर्ष नगर पंचायत से लगभग तीन से चार करोड़ कमाया होगा, अब जरा अंदाजा लगाइए कि अगर 15 हजार मानदेय पाने वाला बाबू करोड़पति बन सकता है, तो ईओ, जेई, प्रशासक और ठेकेदार की हैसियत कितनी होगी, अंदाजा लगाना कठिन हो रहा है। तभी तो कहा जा रहा है, खर्च हुए 20 करोड़ में से 15 करोड़ का बंदरबांट ‘मंचल’ जैसे लोग किए होगें। मंचल के उपर मानो लक्ष्मी की बरसात होती है, इन्हें किसी से कमीशन नहीं मांगता पड़ता लोग एडवांस में कमीशन देने के लिए खड़े रहते है। कोई भी काम हो, मंचल को ही याद किया जाता है। इनकी और इनके चहेतों की कई फर्मे हैं, जिनके जरिए यह करोड़ों का फर्जीवाड़ा करते रहते है। अब जरा अंदाजा लगाइए कि आज तक किसी नेता ने इस भ्रष्ट बाबू को हटाने को नहीं लिखा। कहा जाता है, अगर इन्हें किसी चेयरमैन वाले नगर पंचायत में भेज दिया जाए तो इनकी आमदनी आधे से भी कम हो जाएगी। सवाल यह है, कि इनके तबादले के लिए लिखे कौन, जो लिख सकते और करा सकते हैं, वे तो खुद इनकी तारीफ करते है। यह वर्तमान और पूर्व सभी के चहेते है। चहेते इस लिए हैं, क्यों कि यह नेताओं और उनके ठेकेदारों को कमाकर देते हैं, और कमाई करने का रास्ता भी बताते है। अब आप समझ सकते हैं, जिस बाबू से नेताओं और उनके ठेकेदारों को इतना लाभ हो, वह कैसे बाबू का विरोध कर सकतें हैं? अगर जनता विरोध करे और बाबू के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करे तो बात बन सकती है, सवाल यह है, कि जो काम नेताओं का है, वह जनता क्यों करें? यह पहले ऐसे भ्रष्ट बाबू होगें, जिन्हें गाली नहीं मिलती, बल्कि प्यार मिलता। इनके बस्ती वाले आवास पर ठेकेदारों और आपूर्तिकर्त्ताओं की लाइन लगी रहती है। फर्जीवाड़े में इन्हें महारथ हासिल है। इनके जैसे रुधौली नगर पंचायत में पटेल बाबू हैं, इन्हें भी 15 हजार मानदेय मिलता हैं, लेकिन इनकी और मिश्राजी की आमदनी और हैसियत में कोई फर्क नहीं है। दोनों अकूत संपत्ति के मालिक हैं, अब जरा अंदाजा लगाइए कि नगर पंचायत में 15 हजार मानदेय पाने वाले के पास अगर अकूत संपत्ति होती है, तो सवाल तो उठेगा ही। दोनों बाबूओं को भ्रष्टाचारियों का चहेता माना जाता है।