गंगा मेला की तैयारी जोरो पर श्रद्धालु,दुकानदारों का आना शुरू
गढ़ नगर से मेला को जाने वाली मुख्य सड़क नहीं बनाई गई, भरे गड्ढे
दैनिक तेजयुग न्यूज़
ओमप्रकाश गौतम
गढ़मुक्तेश्वर: पौराणिक कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला के इतिहास में पहली बार ग्रामीण किसान मेला को शहरी मेला बसाने का प्रयास है। मेला क्षेत्र में सेक्टर बनाए गए है। गंगा मेला में हर एक सेक्टर में चौड़ी सड़क दी गई है। मेला में व्यवस्थाओं की तैयारी जोरो के साथ की जा रही है वहीं दुकानदार,श्रद्धालुओं का आना भी शुरू हो चुका है।
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देश में एक ओर जहां सड़कों के जाल बिछाए गए है। तीर्थ नगरी गढ़मुक्तेश्वर से मेला को जाने वाली मुख्य सड़क नहीं बनाई गई। मेला रोड की सड़क के गड्ढे भरे जा रहे है लाखों वाहनों की आवाजाही से गड्ढे ज्यादा रुक नहीं पाएंगे।करोड़ों की लागत पानी की तरह बह जाएगी। महाभारत कालीन गंगा स्नान मेला पांच चरणों में बारह दिवसीय होता है। मेला का मुख्य महत्व चतुर्दशी पर दिवंगतों की आत्म शांति के लिए दीप दान होता है। मेला का उद्घाटन भी एकादशी को किया जाता है जिसमें बीस दिन शेष हैं। जिला अधिकारी कविता मीणा के डायरेक्शन में गंगा स्नान मेला को हर साल से और अच्छा बनाए जाने का प्रयास है। मेला के इतिहास में पहली बार मेला क्षेत्र को सेक्टरों में विभाजित किया गया है। मेला क्षेत्र के सेक्टरों में चौड़ी सड़कें होंगी। मेला क्षेत्र इस बार हापुड़,अमरोहा,मेरठ तीन जिलों की सीमाओं से जुड़ा है। मेला के शुरू होने में अभी तेरह दिन से पहले ही मेला में रौनक बढ़ने लगी है।
तीर्थ नगरी गढ़ से मेला रोड का निर्माण नहीं हुआ=
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महाभारत कालीन साढ़े चार हजार साल प्राचीन कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला हैं। गंगा मेला में 35 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते है। लाखों वाहनों से श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। गढ़ नगर से जाने वाली मेला रोड की सड़क तीन मीटर थी जैसे चौड़ी कर बनाए जाने की मांग लगातार चली आ रही थी। इस साल सड़क को चार मीटर चौड़ी कर खड़ंजा लगाया जा रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से खड़ंजा बनाया जाना तथा पुरानी सड़क के गड्ढे भरे जा रहे है जो लाखों वाहनों से रुक नहीं पाएंगे तो खड़ंजा में करोड़ों की लागत पानी की तरह बह जाएगा।
देश प्रदेश में डबल इंजन की सरकार नहीं बनी सड़क=
देश में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। तीर्थ नगरी में धार्मिक मेला की सड़क नहीं बन पाई। लाखों श्रद्धालु अपनी राह आयेंगे और हर साल की तरह अपनी राह वापस होंगे। गंगा पुल,घाट भी नहीं बन पाया जबकि मुख्यमंत्री की प्रमुखता में गंगा पुल रहा है।
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