बस्ती। भाजपा के महामंत्री हरीेश द्विवेदी का विधायक अजयसिंह के स्वागत करने पर जो टिपणी अजीत प्रताप सिंह ने की, उसे लेकर बवाल मचा हुआ है। विधायकजी के समर्थक अपने-अपने अंदाज और हिसाब से कमेंट का जबाव कमेंट से दे रहे है। सबसे पहले हम आप को अजीत प्रताप सिंह के कमेंट के बारे में बताते हैं, इन्होंने लिखा कि जब लोकसभा चुनाव में हम और अन्य कार्यकर्त्ता मदद कर रहे थे, तब आप को बहुत बुरा लग रहा था, दारुलसभा चंद्रशेखर चबूतरा पर कई एमएलए और एमएलसी एवं अन्य के सामने आप ने हमसे बहस किया था, कि एक पंडित को मंत्री बनाने चले थे, क्या कर पाए, हमने हरा दिया, मैं तो सांसद और मंत्री नहीं बन पाया, पर पार्टी ने महामंत्री बना दिया, आज तष्वीर देख बहुत बुरा लगा कि जब कोई कार्यकर्त्ता पार्टी की मदद करें तो पार्टी के ही विधायक का दुष्मन हो जाता हैं, याद होगा तब भी मैेंने कहा था, कि जो पार्टी से अधिकृत होगा, उसकी मदद करुंगा, यही कर्त्तव्य भी है। आज ऐसा क्या हुआ कि आप स्वागत कर रहे हो? और तो और आप ने बहुत सारे कार्यकर्त्ता से अनुचित व्यवहार भी किया, कहां गई ठकुराई? ऐसी कर्त्तव्य निष्ठा और मजबूरी सभी के साथ होती, जैसी आप पड़ी है। अच्छा होता आज आप ठकुरैती दिखाते, न कभी किसी का दरबारी था, न हूं, और न रहूंगा। जो सहयोग करेगा, उसका सहयोग करुंगा, चाहें आप हो या कोई और हो, बुरा न मानो पार्टी है। मैं ऐसा ही कार्यकर्त्ता हूं। इस पर अजीत प्रताप सिंह लिखते हैं, कि जी बिलकुल सही कहा, आपने, लेकिन मैं तो सहयोग में ही था, पर लोग चाहते थे, कि दरबारी बनकर रहूं। इस पर विवेक सिंह लिखते हैं, कि ठकुरई दिखाने की नहीं बल्कि निभाने की चीज है। ठकुरई जिम्मेदारी है। विधायकजी के परिवार से अधिक ब्राहृमण का सम्मान कम से कम हमने नहीं देखा। लजघटा गांव के आसपास बहुत ऐसे ब्राहृमण के गांव हैं, वहां के लोगों से कभी फीडबैक ले लिजिएगा, कि विधायकजी और उनका परिवार ब्राहृमण का कितना मान और सम्मान करते है। पीढ़ियों का विधायकजी से संबध है। इस पर संतोष सिंह ने लिखा कि ईट का जबाव आपने पत्थर से दिया, यही होना भी चाहिए, भले ही चाहें कहीं का धतूरा हो अपमान नहीं सहेगें।
धमेंद्र पांडेय अयोेध्यावासी लिखते हैं, कि कटु सत्य आपने लिखा है, वही सत्य हैं, और सत्य लिखने की क्षमता हर किसी के बस की बात नहीं होती। रोहित सिंह राजपूत सवाल करते हैं, कि इसका कोई प्रूफ आपके पास है, या सिर्फ पब्लिािटी के लिए व्यक्तिगत आरोप लगा रहे है। राजनीति करिए, लेकिन किसी के उपर बिना तथ्य के आरोप मत लगाइए। अवधेश सिंह कहते हैं, कि सवर्ण समाज से वुनकर या मनोनीत होकर जो भी नेता हुए उन्होंने समाज के लिए क्या किया, चाहें जितना बड़ा पद मिल जाए, इनके मुंह से सवर्ण समाज के लिए एक षब्द भी नहीं निकलता, यूजीसी और आरक्षण जैसा ज्वलंत मुद्वा हैं, पूरा सवर्ण समाज इन लोगों की ओर देख रहा है, कि कुछ बोलेंगे, इन लोगों को सिर्फ पद और प्रतिष्ठा चाहिए, इन लोगों से अच्छा तो ओमप्रकाश राजभर हैं। दिवाकर सिंह कहते हैं, कि राजनीति में ऐसा अप्रत्याषित घटनाएं बार-बार देखने को मिलती है। निर्मल सिंह लिखते हैं, कि कुछ लोगों के लिए भाजपा 2024 में ही आई, उसके पहले 2014, 2017, 2019 और 2022 में न तो बस्ती में भाजपा थी, न उसके कोई प्रत्याशी था, अनर्गल अलाप मत अलापिए, जिसका कोई प्रमाण न हो। मनोज कुमार लिखते हैं, कि चाचाजी इन बरसाती मेढ़कों को भगााइए, इन नशेड़ियों की हैसियत नहीं आप से सवाल करे। बृजेद्र सिंह लिखते हैं, कि जितना बड़ा समर्थक आप भातपा और हरीशजी के हैं, और लोग भी होगें, जितना कटाक्ष आपने ने विधायकजी पर कर रहें हैं, उसके आगे बताना चाहता हूं, कि 2017 में जो भाजपा ने अजय सिंह को टिकट दिया, तब आप राजकिशोर सिंह को जीता रहे थे, मंटू सिंह की दुकान पर हर्रैया में हम भी भाजपा के समर्थक हैं, हरीशजी के और अजय सिंह के समर्थक है। दुर्गेश कुमार लिखते हैं, कि 2014 में हरीशजी जब पहली बार सांसद बनकर बस्ती में प्रमाण-पत्र लेने गए तो यही राजकिशोर सिंह प्रमाण-पत्र लेने नहीं दे रहे थे। विक्रम सिंह लिखते हें, कि कुछ लोग तो योगीजी का भी विरोध करते हैं, उनका क्या। आगे लिखते हैं, कि 2022 में विरोध हुआ था, भैया को हराने के लिए यी बात आप कहां भूल गए। रंजीत सिंह लिखते हैं, कि योगीजी से बैर नहीं, तोदीजी की खैर नहीं, 2029 में जो भी भजपा का टिकट लाएगा, वह धरासाई हो जाएगा। राम भक्त यादवेंद्र सिंह लिखते हैं, कि किसी के सामने अच्छा बनने के लिए दूसरे को बुरा साबित करना पड़ता, आप भी वही कर रहे हैं, अजय सिंह और हरीशजी जिंदाबाद।
0 Comment