निरस्त’ हो सकता, ‘बाबूजी’ के ‘सिफारिश’ वाला चर्चित ‘अनुबंध’, एक तरफ ‘जांच’ लंबित, फिर भी ‘सीटीओ’ ने ‘कर’ दिया ‘मां काली’ को ‘डेढ़ करोड़’ का फर्जी ‘भुगतान’ दूसरी तरफ जांच पूरी नहीं हुई, और सीएमओ ने कर दिया जय कांस्टक्षन के जनेष्वर चौधरी का अनुबंध

-मां लक्ष्मी टेडिगं कंपनी ने कमीशन नहीं दिया तो सिविल का एक भी काम नहीं दिया, और 70 लाख काम और भुगतान उन ठेकेदारों को टुकड़ों में कर दिया, जिसने कमीशन दिया

-तत्कालीन सीएमओ आरसी मिश्र ने मां लक्ष्मी टेडिगं का अनुबंध नियम से किया, और वहीं पर वर्तमान सीएमओ डा. राजीव निगम ने बाबूजी के चहेते ठेकेदार जनेष्वर चौधरी का अनुबंध मात्र कुछ घंटो में अनियमित रुप से कर दिया

-इस अनियमित अनुबंध को लेकर सीडीओ ने जांच अधिकारी एडी हेल्थ से जांच रिपोर्ट और पत्रावलली के साथ तलब किया, इसे लेकर सीएमओ कार्यालय और ठेकेदार में अनुबंध निरस्त होने को लेकर खलबली मची

बस्ती। नेताजी लोग जितना गलत काम करवाने के लिए सिफारिश करते हैं, उतना अगर आम आदमी के सही काम के लिए पैरवी करते तो कभी नेता हारेगा ही नहीं, नेताजी के चहेते ठेकेदार अच्छी तरह जानते है, कि नेताजी एक बार आम आदमी की पैरवी नहीं करेगें, लेकिन उसकी सिफारिष उन्हें करनी ही पड़ेगी, क्यों कि अगर ठेका पटटी मिल गया तो लाभ दोनों का होगा, लेकिन सही काम कराने में गरीबों से कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। गरीबों से आर्थिक लाभ भले ही नेताजी को न मिले, लेकिन चुनाव में अवष्य मिलेगा, क्यों कि नेताजी ने जिस गरीब का काम करवाया, वह पूरे गांव जवार में हल्ला करेगा कि नेताजी ने उसका काम करवा दिया, वह नेताजी की जयजयकार करेगा, और वहीं पर ठेकेदार जयजयकार इस लिए नहीं कर सकते हैं, क्यों कि नेताजी ने गलत काम करवाया। रही बात अधिकारियों की तो यह भी गरीब की मदद उतनी ईमानदारी और लगन से नहीं करते, जितना नेताओं की एक सिफारिश पर करते है।

सवाल उठ रहा है, कि क्या किसी आईएएस, आईपीएस, पीसीएस और पीपीएस अधिकारियों में इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह नेताजी को यह समझा सके, कि काम गलत हैं, इस लिए नहीं हो सकता। यकीन मानिए कि अगर किसी अधिकारी ने यह कह दिया तो नेताजी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगें, क्यों कि नेताजी को डर रहता है, कि कहीं अगर भेद खुल गया तो बड़ी फजीहत होगी। यह भी सही है, कि जिले के एक भी नेता के अंदर इतनी हिम्मत नहीं हैं, कि वह किसी ईमानदार अधिकारी का कुछ बिगाड़ सके, बेईमान का तो बिगाड़ ही नहीं पा रहें हैं, ईमानदार का क्या बिगाड़ेगें? तबादला और निलंबित करवाना तो दूर की बात है। सरकार में रहते हुए भी महादेवा के विधायक दूधराम एक भ्रष्ट महिला सचिव का तबादला नहीं करवा सकें। यह है, आजकल के नेताओं की असलियत।

हम बात कर रहे थे, वर्तमान सीएमओ डा. राजीव निगम की। यह बाबूजी की बात मानकर बुरे फंस गए, अनुबंध तो आज नहीं तो कल निरस्त होगा ही। लेकिन सीएमओ साहब का क्या होगा, इसे सीएमओ को भी नहीं मालूम। बाबूजी के दबाव में आकर सीएमओ ने अनियमित तरीके से जय कांस्टक्षन के जनेष्वर चौधरी का अनुबंध तो कर लिया, लेकिन वह भूल गए, कि जिसका टेंडर निरस्त किया, वह चूकने वाला नहीं है। एक दिन पहले सीडीओ ने शिकायतकर्त्ता दीपक कुमार मिश्र को कार्यालय बुलाया, और अनुबंध के बारे में पूरी जानकारी ली, सीडीओ को बताया कि जब डीएम के आदेश पर एडी हेल्थ जांच कर रहे हैं, तो फिर कैसे बिना जांच पूरा हुए बिना एक ही दिन में अनुबंध 30 मार्च 26 को कर दिया। जय कांस्टक्षन के सारे कागजात दिखाए गए, और बताया कि किस तरह सीएमओ ने नेताजी के दबाव में आकर अनियमित एवं अपूर्ण निविदा का अनुबंध कर दिया। पत्रावली देख सीडीओ भी हैरान रह गए, और उन्होंने त्वरित एडी हेल्थ को जांच रिपोर्ट और पत्रावली के साथ आने को कहा। आनन-फानन में सीएमओ कार्यालय से वह पत्रावली एडी हेल्थ के पास गई, जिसे एडी हेल्थ पिछले तीन माह से सीएमओ से मांग रहे थे, और सीएमओ नहीं दे रहे थे, सच पूछिए तो एडी हेल्थ और सीएमओ, बाबूजी के दबाव में रहें। यह लोग ऐसे काम के लिए दबाव में रहे, जो नियम विरुद्व था। अब एडी हेल्थ चाहकर भी गलत रिपोर्ट नहीं दे सकते, इन्हें सही रिपोर्ट देना ही होगा, और सही रिपोर्ट देने का मतलब अनुबंध का निरस्त होना। देखना है, कि अब बाबूजी इसमें दखल देते हैं, कि नहीं। वैसे बाबूजी की इस मामले में काफी बदनामी हो चुकी है। वह कभी नहीं चाहेंगे कि और बदनामी हो।

अब जरा अंदाजा लगाइए, दीपक कुमार मिश्र की जिस शिकायत पर सीडीओ और सीटीओ जांच कर रहे हैं, और बिना जांच पूरी हुए, 31 मार्च 26 को रातों-रात सीटीओ ने मां काली के अमर नाथ यादव को विधुत कार्य का अनियमित तरीके से लगभग डेढ़ करोड़ का भुगतान कर दिया, उसके बारे में स्वंय यादवजी कहते फिर रहे थे, कि उन्होंने बड़े अधिकारी को 20 लाख दे दिया, अब जांच नहीं होगी। इसकी भी लिखित में शिकायत हुई। एिक तरफ सीडीओ और सीटीओ जांच कर रहे हैं, और दूसरी तरफ जांच अधिकारी सीटीओ खुद फर्जी भुगतान कर रहे है। मां लक्ष्मी टेडिगं के घनष्याम मिश्र को सिविल का एक भी काम इस लिए नहीं दिया, क्यों कि इन्होंने कमीशन नहीं दिया, और तो और लगभग 70 लाख के सिविल का फर्जी भुगतान टुकड़ों-टुकड़ों में कमीशन लेकर कर दिया। यह भुगतान उन कार्यो पर फर्जी तरीके से किया, जिसे मां लक्ष्मी टेडिगं पहले ही करवा चुकी। पुराने कार्य को नया दिखाकर फर्जीवाड़ा किया गया। इसकी भी जांच हो रही है। सीएमओ, सीएमओ में फर्क होता है। एक सीएमओ डा. राजीव निगम हैं, जो बाबूजी के दबाव में आकर 12-14 घंटे में ही जय कास्टक्षन के नाम बिना औपचारिता पूरा किए, 30 मार्च 26 को अनुबंध कर दिया, और एक सीएमओ डा. आरसी मिश्र भी रहे। जिन्होंने मां लक्ष्मी टेडिगं का अनुबंध तब तक नहीं किया जब तक सारी औपचारिता पूरी नहीं हो गई। अनुबंध करने में एक सप्ताह लग गया।