बस्ती। ऐसा लगता है, कि जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी की मनोकामना पूरी होने वाली है। चार दिन पहले इन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा था, जिसमें अगर चुनाव समय से नहीं होता तो प्रशासक नियुक्ति करने के बजाए जिला पंचायत अध्यक्ष, क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष और ग्राम प्रधानों का चुनाव होने तक कार्यकाल बढ़ाए जाने की अपील की थी, अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने लिखा था, जनप्रतिनिधियों की अपेक्षा प्रधासक गुणवत्तापरक कार्य नहीं करा पातें। एक दिन पहले क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों के राज्य स्तरीय कार्यशाला पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने क्षेत्र पंचायतों अध्यक्षों के कार्यकाल को बढ़ाए जाने का आष्वासन दिया था। कहा कि सरकार कार्यकाल बढ़ाएगी। कहा कि आप लोगों की भावनाओं की कद्र होगी और हम खुद इसके समर्थक है। कहा कि चूंकि चुनाव का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कहा कि अगर कोर्ट आदेश देती है, तो हम चुनाव कराने को तैयार है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि पदेन पदाधिकारियों को ही प्रशासक बनाकर उनका कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखेगें। इसे लागू कराने का प्रयास भी करेगें। कहा कि राजस्थान, एमपी एवं उत्तराखंड में पदेन पदाधिकारियों को ही प्रशासक बनाया गया है। ऐसे में मजबूत प्रस्ताव तैयार किए जा रहे है। वहीं इससे पहले ब्लाक प्रमुखों ने चुनाव न होने की दशा में कार्यकाल बढ़ाए जाने को लेकर नारेबाजी और हंगामा किया। कुछ प्रमुखों ने इसके लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही। ब्लॉक प्रमुख संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह एवं संरक्षक जगमोहन सिंह यादव ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव न होने की दशा में पदेन पदाधिकारियों को ही प्रशासक बनाने की मांग रखी। कहा कि जब तीन राज्यों में यह व्यवस्था लागू हैं, तो इसे यूपी में भी लागू करना चाहिए। उन्होंने हर ब्लाक पर एक सरकारी वाहन, एक करोड़ का बीमा, ब्लॉक प्रमुखों को जिले में सीएम व मंत्री के कार्यक्रम में आंमत्रित किया जाए। अध्यक्ष ने कहा कि हम्हें संख्या बल के आधार पर अपनी ताकत दिखानी होगी। प्रमुख सचिव पंचायती अनिल कुमार ने सभी मांगों को पूरा करेंगे। मंत्री ने कहा कि जल्द ही ब्लॉक प्रमुखों की विकास निधि को दस से 15 लाख कर दी जाएगी। ब्लॉकों पर एडीओ को बैठने की व्यवस्था की जाएगी। बता दें कि प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 26 को खत्म हो रहा है। इसे देखते हुए ग्राम पंचायतों की कमान प्रशासकीय समिति को सौंपी जा सकती है। या फिर प्रधानों और ब्लॉ प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। इस पर सभी की निगाहें हाईकोर्ट पर टिकी हुई है। अगर कार्यकाल बढ़ गया तो यह माना जाता है, कि जमकर लूटखसोट होगी। हालांकि प्रशासक भी कम लूटखसोट नहीं करते, बस इन्हें नौकरी का डर रहता है, और पदेन पदाधिकारियों को नहीं रहता है। इसे वह अवसर मानकर लूटेगें।