बस्ती। पत्रकारिता के क्षेत्र में भले ही सुदृष्टि नरायन त्रिपाठी ने उनका नाम और षोहरत नहीं कमाया, लेकिन इन्होंने जो नाम और शोहरत आरटीआई कार्यकर्त्ता के रुप में कमाया, वह बहुत कम आरटीआई कार्यकर्त्ता को कमाने का मौका मिलता है। आरटीआई के प्रति इनका जो जूनून हैं, उसे देखते हुए इन्हें आरटीआई का हीरो कहा जाता है। यह पहले ऐसे आरटीआई कार्यकर्त्ता होगें, जिन्हें जेल भी जाना पड़ा, यह अलग बात हैं, कि जेल भेजवाने जिला अस्पताल के एसआईसी खुद घेंरे में आ चुके है। इनका एक पैर बस्ती तो दूसरा राज्य सूचना आयुक्त कार्यालय रहता है। इनकी अधिकतर रातें बस में या फिर टेन में बीतती है। यह पहले ऐसे आरटीआई कार्यकर्त्ता होगें जिन्होंने पूरे प्रदेश के लगभग सभी विभागों के जन सूचना अधिकारी के खिलाफ 25 हजार का जुर्माना लगवा चुके है। सचिवालय के अधिकारी के खिलाफ भी यह जुर्माना लगवा चुके है। एक तरह से इनका खौफ बस्ती में तो रहता ही है, प्रदेश के अन्य जिलों में भी रहता है। जिस तरह इन्होंने एक साथ विभिन्न विभागों और विभिन्न जिलों के 20 से अधिक बीडीओ, नगर पंचायत/नगर पालिका के ईओ, जिला अल्प संख्यक अधिकारी पर 25-25 हजार का जुर्माना लगवाया, उससे इनकी सक्रियता का पता चलता है। इन्हीं के चलते सरकार के खजाने में तुर्माने के रुप में 20 लाख जमा होने वाला है। इनमें नगर पालिका बस्ती के ईओ, नगर पंचायत बभनान के ईओ, बदायूं दातागंज पालिका के ईओ, गोरखपुर बड़हलगंज के ईओ, सिद्वार्थनगर के नगर पालिका बांसी के ईओ, शोहरतगढ़, नगर पंचायत कप्तानगंज के ईओ, नगर पालिका खलीलाबाद के ईओ, नगर पंचायत नौतनवां महराजगंज के ईओ, नगर पंचायत पऱतावल के ईओ, बीडीओ सल्टौआ, बीडीओ परसरामपुर, डीपीआरओ बस्ती सहित अन्य का नाम शामिल है। अब सवाल उठ रहा है, कि आखिर क्यों 25 हजार का जुर्माना वेतन से देने को तैयार हो जाते हैं, लेकिन चाही गई जानकारी नहीं देतें। कोई अधिकारी यह न समझे कि उसने जुर्माना भर दिया तो वह सूचना देने से वंचित हो गया, सूचना तो उन्हें जुर्माना अदा करने के बाद भी देना पड़ेगा। कहा भी जाता है, कि सूचना वही अधिकारी नहीं देते जो योजनाओं में गड़बड़ी किए रहते हैं, उन्हें इस बात का डर रहता है, कि अगर उन्होंने सूचना दे दिया तो उनके भ्रष्टाचार की पोल खुल जाएगी। यह उन अधिकारियों का भ्रम रहता है, कि सूचना देने से कहीं उनके खिलाफ कार्रवाई न हो जाए। यह भी सही हैं, कि प्रदेश का कोई नगर पंचायत, पालिका और क्षेत्र पंचायतें नहीं जो भ्रष्टाचार में न डूबी हो। अनेक ऐसे घटना भी सामने आया, जहां पर सूचना के नाम पर धन उगाही की गई।
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