बस्ती। भाजपा के राष्टीय महामंत्री हरीष द्विवेदी के प्रथम आगमन पर इस स्वागत समारोह का क्या नाम दिया जाए, इसे लेकर लोग परेषान रहें, यहां तक कि अनेक मीडिया को भी यह समझ में नहीं आ रहा था, कि इस स्वागत की कौन सी हेडलाइन बनाई जाए, कई लोगों ने हेडिगं तलाशने के लिए गुगल बाबा तक का सहारा लिया। किसी ने शाहीठाट, गूंजता जयघोश कहा, तो किसी ने इसे राजश्री अंदाज में इंटी बताया, किसी ने इसे हरीश द्विवेदी के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब, शाही अंदाज में हुआ अभिनंदन कहा, किसी ने फूलों की बारिश और ढोल नगाढ़ों के साथ हरीशजी का हुआ ऐतिहासिक स्वागत बताया, किसी ने इसे शहरों और एनएच पर हरीशजी का भव्य रोड शो, चप्पे-चप्पे पर स्वागत कहा, किसी ने हरीशजी के दीदार के लिए सड़कों पर उतरे लोग, बना नया रिकार्ड बताया, किसी ने इसे शंखनाद और शक्ति प्रदर्षन कहा तो, किसी ने इसे हरीश द्विवेदी के स्वागत से बदली जिले की राजनीति की बयार कहा, किसी ने जनता का हूजूम, हरीशजी का जलवा कहा, किसी ने इसे महास्वागत कहा, किसी ने बस्ती हुआ हरीशजी के रगं में सराबोर बताया, तो किसी ने पलकों पर हरीश द्विवेदी तो किसी ने ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कहा। हूजूम देख लोगों को समझ में ही नहीं आ रहा था, कि इसे क्या नाम दिया जाए? लगभग 35 साल की पत्रकारिता में यह पहली बार देखा गया, जब स्वागत की हेडिंग बनाने के लिए अनेक लोगों का सहारा लेना पड़ा। लोगों से पूछा गया, कि इसकी क्या हेडिगं बन सकती हैं? क्यों कि इससे पहले इस तरह का स्वागत जिले की मीडिया और जनता ने नहीं देखा था, दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर यूपी भवन, लखनउ एयरपोर्ट से लेकर लखनउ शहर और घघौवा पुल से लेकर सोयेष होटल तक ऐसा शानदार और जानदार स्वागत रहा कि जिसे देखकर बड़े-बड़े लोग हैरान और दंग रह गए, प्रधानमंत्री के बाद पहली बार रुट डाईवर्ट होते देखा गया, पहली बार बस वाहन वाले स्कूलों की छुटटी इस लिए की गई, क्यों कि बच्चे जाम में न फंस जाए। विरोधियों की तो मानो उनके सीने में सांप लोट गया हो। जो लोग स्वागत करने को तैयार नहीं थे, उन्हें भी मजबूरी में स्वागत के लिए उतरना पड़ा, कई लोग तो अपने कार्यक्रम को जिले से बाहर रखवा लिया था, ताकि यह दिखाया और बताया जा सके, कि बाहर रहने के कारण स्वागत समारोह में नहीं आ सके। ऐसे लोग बधाई देने में कंजूसी कर रहे थे, और स्वागत करने में भी कंजूरी कर गए। जिस तरह दिल्ली से लेकर बस्ती तक स्वागत की गूंज होती रही है, उसे देख विरोधी के खेमे में हलचल होना लाजिमी है। हलचल तो मुख्यमंत्री के खेमे में भी हुई, जिसे पूरी दुनिया ने देखा भी। अधिकांश लोगों का कहना और मानना था, कि अगर पंचायत और विधानसभा का चुनाव करीब न होता तो उस तरह का स्वागत समारोह नहीं हो पाता, जितना अब हुआ है। यह सही है, कि जितने भी नेताओं के बैनर, पोस्टर और होडिंग जगह-जगह लगे हुए हैं, उनमें आधे से अधिक जिला पंचायत अध्यक्ष, प्रमुख और विधायक बनना चाहते है। इसी इच्छा के चलते लोग करोड़ों रुपया पोस्टर, बैनर और होर्डिंग सहित भीड़ जुटाने में फंूक चुके है। इनमें ऐसे लोग भी षामिल है, जिन्होंने हरीशजी को लोकसभा चुनाव हराने में धन और बल दोनों का इस्तेमाल विरोधियों के लिए किया, ताकि विरोधी जीत सके और हरीशजी हार जाएं। पोस्टर, बैनर, होर्डिगं और भीड़ के जरिए हर कोई हरीश द्विवेदी का खास बनना चाहता है। चेहरा दिखाने में होड़ सी लगी रही, मीडिया वालों से स्वागत समारोह और हरीशजी के साथ लिए गए फोटो और नाम लिखाने के लिए परेशान रहे। 14 ब्लॉक और पांच विधानसभा, लेकिन दावेदारी सैकड़ों में। अब हरीशजी किन-किन को प्रमुख और विधायक बनाएगें यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन जिस तरह चेहरा दिखाने और खास बनने के चक्कर पानी की तरह पैसा बहाया गया, वह चर्चा का विषय बना हुआ है। जिस दिन लोगों की इच्छा पूरी नहीं होगी, उस दिन लोग हरीषजी और पार्टी के विरोधी और दुष्मन बन जाएगें। यही लोग भाजपा प्रत्याशी को हराने में उनके विरोधियों से मिलकर उन्हें उसी तरह धन और बल का से मदद करेंगे, जिस तरह लोकसभा चुनाव में किया। जिन लोगों के सपने साकार नहीं होगें, उनमें एक फीसद भी ऐसे नहीं होगें, जो सबकुछ भूलकर पार्टी प्रत्याशी की मदद करेगें, यही भाजपा के हार का सबसे बड़ा कारण बनेगा। तब हो सकता है, कि हरीशजी का सपना पांचों विधानसभाओं में भाजपा का परचम लहराएगें की अधूरा रह जाएगा? अगर हरीशजी को फायदा हैं, तो नुकसान भी हैं। अब देखना होगा, कि फायदा अधिक होता या फिर नुकसान। सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है, कि स्वागत करने वालों में ऐसे कितने लोग हैं, जो हरीशजी के बुरे दिनों में काम आए होगें। जाहिर सी बात हैं, कि हरीषजी भी उन्हीं लोगों का ध्यान रखेंगे जो उनका रखा है। ऐसे गिने चुने लोग ही होगें।