बस्ती। आप लोगों का सोचना सही हैं, कि यह रेट जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में खाद और बीज के खुदरा लाइसेंस का है। यह फीस तब का जब आप के सारे कागजात मानक के अनुसार हैं, अगर कहीं जरा सा भी मानकनुसार नहीं हुआ तो यह फीस दोगुना तक हो जाता है। लाइसेंस लेने वाला अच्छी तरह जानता है, कि बिना 20 हजार दिए, लाइसेंस बाबू आपकी तरफ देखा भी नहीं, पत्रावली देखना तो दूर की बात है। इसी लिए वह पहले से 20 हजार ले कर जाता है, और बिना कुछ कहे और मांगे चुपके दे देता है। चूंकि कार्यालय में एक साजिश के तहत सीसी कैमरा नहीं लगाया गया, इस लिए खुले आम नोट लेने में कोई हिचक नहीं होता। 20 हजार मिल जाने के बाद आवेदनकर्त्ता को लाइसेंस पाने में जरा सा भी परेशानी नहीं होती, उसे न तो भागदौड़ करना पड़ता और न किसी नेता से सिफारिश ही करवाना पड़ता। लाइसेंस पाने का सुलभ तरीका इससे पहले कभी नहीं था। पैसा मिल जाने के बाद न तो चौहद्वी देखी जाती है, और न शैक्षिक प्रमाण-पत्रों की ही छानबीन होती है। जब कि इसके लिए सरकार ने एडीओ यानि अतिरिक्त जिला कृषि अधिकारी की तैनाती की है। इनका एक मात्र काम अभिलेखों का सत्यापन और चौहद्वी का निरीक्षण करना है, यह सीधे आयोग से आए हैं, लेकिन भ्रष्टाचारियों ने इन्हें भी अपने रगं में डाल दिया। इनका अधिकांश निरीक्षण और सत्यापन कार्यालय में ही बैठ कर होता है, इसी लिए आज तक एक भी आवेदन रिजेक्ट नहीं हुआ। कहने को तो लाइसेंस बाबू तैनात हैं, लेकिन लाइसेंस का सारा काम बाहर के कर्मचारी से कराया जाता है। अधिकतर सत्यापन का कार्य बैक डेट में एडीओ करते है। हर माह लगभग 60-70 लाइसेंस जारी होते है। लगभग 15 से 16 लाख की कमाई होती है। यह सब उस कार्यालय में होता है, जिसके मुखिया मंत्रीजी के चहेते हैं, चहेते इस लिए हैं, क्यों कि यह मंत्रीजी के लिए सबसे अधिक कमाउपूत जो हैं। जिले में यह चाहें जितना भ्रष्टाचार करे, चाहें जितना किसान शिकायत करें, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। डीएम तक इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाते। अब जरा उस एडीओ पर नजर डालिए, जिसने पहली ज्वाइनिगं बस्ती में किया, और उसे भ्रष्टाचारियों के बीच में काम करना पड़ रहा है, आगे चलकर इनकी भी गिनती भ्रष्ट अधिकारियों में होने लगेगी। इन्हीं की ही रिपोर्ट पर लाइसेंस जारी होता हैं, और इन्हें 20 हजार में से मुस्किल से पांच सौ रुपया मिलता होगा। मीडिया ऐसे नौजवान अधिकारियों को सलाह देती है, कि इन भ्रष्ट बाबूओं और अधिकारियों के बीच में पड़कर अपना कैरियर मत बर्बाद कीजिए। अगर आप को भी भ्रष्ट अधिकारी बनना है, तो इनके खेल में शामिल हो जाइए, अगर नहीं बनना है, तो सत्यापन कीजिए। जो बाहर का बाबू काम करता है, उसका विरोध करिए, नहीं तो यही लोग एक दिन आप कों ऐसा फंसा देगें कि रोते हुए नहीं बनेगा। सच कहा जाए तो लाइसेंस सहित खाद की कालाबाजारी वर्तमान डीओ के कार्यकाल में बढ़ा।
- Loading weather...
- |
- Last Update 28 Oct, 02:07 PM
- |
- |
- खबरें हटके
- |
- ताज़ा खबर
- |
- क्राइम
- |
- वायरल विडिओ
- |
- वीडियो
- |
- + More
0 Comment