बस्ती। मरीजों की माने तो 100 एमसीएच बेड हर्रैया अस्पताल के मालिक सीएमएस नहीं बल्कि फार्मासिस्ट शुक्लाजी है। यह जो चाहतें हैं, वही अस्पताल में होता है, सीएमएस के चाहने और न चाहने का कोई मतलब नहीं। कहने का मतलब अस्पताल के सर्वेसर्वा शुक्लाजी ही है। यह जिसे चाहेगें वह उसकी हाजीरी लगेगी और जिसे नहीं चाहेगी, उसकी नहीं लगेगी। इनके कहने पर ही आनलाइन पर्ची कटती है, और न चाहने पर आफलाइन कटती, ताकि गैरहाजिर या फिर लेट आने वाले डाक्टरों को बचाया जा सके। सात मई 26 को जब सीएमओ ने अनेक षिकायतों और मीडिया की रिपोर्ट को संज्ञान में लेकर दिन में लगभग 11 बजे अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो मौके पर डा. अजय पटेल और डा. अनिता वर्मा ही मिली, जब सीएमओ ने शुक्लाजी से उपस्थित पंजिका मांगा तो वह त्वरित उपलब्ध नहीं करा पाए, बल्कि काफी देर बाद उपलब्ध कराया, इसे लेकर सीएमओ ने शुक्लाजी को फटकार भी लगाया। शुक्लाजी क्यों बिलंब से पंजिका प्रस्तुत किया, इसे आसानी से समझा जा सकता है। बड़े बाबू बजरंग प्रसाद भी मिले, लेकिन सीएमएस नहीं मिली। वैसे भी सीएमएस माह में दो चार दिन ही अस्पताल आती है। यही हाल डा. मनोज चौधरी का भी है। इन्हें जब अपने अस्पताल से फुर्सत मिल जाता है, तो हर्रैया आ जाते हैं, वरना इनकी मर्जी आए या न आए, कोई पूछने वाला नहीं, और पूछेगा कौन, जब पूछने वाली सीएमएस ही लापता रहेंगी। उपस्थित पंजिका इस लिए कार्यालय में न रहकर शुक्लाजी के पास रहता है, क्यों कि यही हाजीरी लगाते है। इसी लिए मरीजों की नजर में शुक्लाजी फार्मासिस्ट कम और डाक्टर अधिक नजर आते है। मीडिया और मरीज बार-बार यह कहते आ रहे हैं, इस अस्पताल में दिन में दो बजे के बाद न तो कोई डाक्टर मिलते हैं, और न कोई फार्मासिस्ट, अगर किसी मरीज को एमरजेंसी हो जाए तो ढूढे हुए भी डाक्टर मरीज नहीं मिलते, पैथालाजिस्ट तक दो बजे के बाद नहीं मिले, दवा तक नहीं मिलती। मिलते हैं, तो स्टाफ नर्स और सुरक्षा कर्मी। प्रदेश का यह पहला ऐसा महिला अस्पताल होगा, जहां पर गर्भवती महिलाओं को अगर दो बजे के बाद अगर कोई एमरजेंसी आ गई तो कोई नहीं मिलेगा। दो बजे के बाद किन-किन डाक्टरों की तैनाती है, इसे भी सार्वजनिक नहीं किया जाता और न चस्पा ही किया जाता है। इसकी जानकारी बजरंग प्रसाद और शुक्लाजी को ही रहती है, और किसी को भनक तक नहीं लगती। ऐसे में आखिर गर्भवती महिलाएं और उनके तीमारदारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। जो काम डाक्टर कर सकते हैं, वह काम स्टाफ नर्स और सुरक्षा कर्मी नहीं कर सकतें। जिस तरह इस अस्पताल में गरीब गर्भवती महिलाओं के जान के साथ खिलवाड़ किया जाता है, उसने सारी व्यवस्था की पोल खोल दी। यहां के सीएमएस, डाक्टरों, फार्मासिस्ट और पैथालाजिस्ट और एलटी को इस बात की जरा सी भी परवाह नहीं रहती कि सरकार उन्हें मरीजों के देखभाल के लिए लाखों रुपया वेतन देती है, न कि मौजमस्ती के लिए। इस अस्पताल के सीएमएस से लेकर डाक्टर और फार्मासिस्ट से लेकर पैथालाजिस्ट और एलटी तक को अपनी जिम्मेदारी का जरा भी एहसास नहीं। इस अस्पताल का हर व्यक्ति लूटने में लगा हुआ है, कितना लूट सके, उसी में लगा रहता है। मानो यह अस्पताल न होकर अवैध कमाई का जरिया बन गया हो। अब आप समझ लीजिए कि जब सीएमओ के 11 बजे की जांच में दो डाक्टर्स को छोड़ अन्य कोई नहीं मिला, तो दो बजे की जांच में तो एक भी डाक्टर नहीं मिलेगंे।
- Loading weather...
- |
- Last Update 13 May, 05:50 PM
- |
- |
- खबरें हटके
- |
- ताज़ा खबर
- |
- क्राइम
- |
- वायरल विडिओ
- |
- वीडियो
- |
- + More
0 Comment