बस्ती। जिले की पुलिस का कोई जबाव नहीं, यहां की पुलिस ‘एक केले के पेड़ की चोरी का वायरल वीडियो’ पर तो पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लेती है, लेकिन बलात्कार की शिकार नाबालिग लड़की के सुसाइड करने का मुकदमा दर्ज नहीं करती। क्या यही है, बस्ती पुलिस की पहचान? लड़की के परिवार वालों का कहना है, कि लालगंज की पुलिस अगर उनकी शिकायत पर आरोपी अरविंद, मिथुन, शक्तिमान और उसकी माता के खिलाफ समुचित कार्रवाई कर देती तो मेरी बेटी लोकलाज के डर से फंासी न लगाती। सवाल उठ रहा है, कि एक 15 साल की उस लड़की के आत्महत्या करने का जिम्मेदार कौन, जिसका बार-बार बलात्कार किया गया और जिसने लोकलाज के डर से आत्महत्या कर लिया? देखा जाए तो इसके लिए लालगंज पुलिस, बलात्कारी और बलात्कारी का वह परिवार, जिसने अपने नालायक लड़के को दोषी मानने के बजाए लड़की को ही आवारा और बदचलन करार दे दिया जिम्मेदार हैं? सुसाइड करने के बाद मृतका की माता थाने का चक्कर लगाती रही, लेकिन लालगंज पुलिस ने लड़की के माता की न तो पीड़ा को समझा और न दर्द को महसूस किया। अगर सुन लेती तो माता को केस दर्ज करवाने के लिए अधिवक्ताओं और पुलिस के अधिकारियों के पास न जाना पड़ता। आरोपी आज खुले आम न घुमते जेल के पीछे होते। तत्कालीन एसपी तक से महिला मिली, फिर भी उसे न्याय नहीं मिला। 19 फरवरी 26 को जब मीडिया ने नवागत एसपी को इसकी जानकारी दी, तब एसपी ने कहा कि जाइए आज मुकदमा दर्ज हो जाएगा। खबर लिखे जाने तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था।

लालगंज पुलिस पर बराबर अपराधियों और आरोपियों का साथ देने का आरोप लगता रहा है। इस थाने की पुलिस पर अपराधियों का दिलखोलकर स्वागत करने और फरियादी और पीड़ितों का अपमान एवं दुत्कारने  का आरोप लगता रहा है। ऐसा लगता है, कि मानो यहां की पुलिस को बदमाशो और बलात्कारियों का विशेष ध्यान रखने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। जिस तरह इस थाने में समाज और सरकार के दुष्मनों का आवभगत किया जाता हैं, अगर उसका दस फीसद भी पीड़ितों और फरियादियों पर अपना प्यार लुटाती, तो आज पुलिस पर पक्षपात करने का आरोप न लगता। क्षेत्र के लोगों का कहना है, कि बहुत कम ऐसा देखा गया है, कि थाने की पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाया हो। कहते हैं, कि जिस थाने पर पीड़ित हाथ जोड़े खड़ा रहता हो और उसके सामने आरोपी को कुर्सी पर बैठाया जाता हो, उस थाने के बारे में कुछ भी कहा जा सकता है। इस थाने पर उच्चाधिकारियों के आदेश और निर्देषों का बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ता, थानेदार को जो अच्छा और लाभकारी लगता है, वही करते है। हालांकि कमोवेश यही हालत अन्य थानों और कोतवाली की भी है। एक भी थानेदार ने लालगंज थाने को आइडिएल बनाने का प्रयास नहीं किया। तभी तो थानेदार के तबादला होने के बाद क्षेत्र के लोग दुखी नहीं होते और न ढ़ोल बाजे से बिदाई ही करते। बहुत कम ऐसे थानेदार होगें जिनके जाने के बाद क्षेत्र के लोग उन्हें याद किए हों। याद करने के बजाए यह कहते हैं, कि चलो अच्छा हुआ चला गया। उन लोगों ने अवष्य याद किया जो लोग थानेदार की नजर में प्रिय रहें हो, ऐसे प्रिय लोगों में सबसे अधिक अपराधी और बदमाश किस्म के लोग ही रहें है।

अब हम आप को बताते हैं, कि एक 15 साल की लड़की ने क्यों आत्महत्या किया। लड़की को खोने वाली माता ने रो-रो कर बताया कि उसकी लड़की बनकटी के सरकारी स्कूल में पढ़ती थी, कहा कि कुछ दिन पहले शक्तिमान पुत्र पंजाबी निवासी जोगिया उर्फ मरवटिया थाना लालगंज गांव के सीवान में मेरी लड़की के साथ बलात्कार किया, और वीडियो भी बनाया। बताया कि डर के माने लड़की ने पढ़ाई तक छोड़ दिया। जब इसकी शिकायत लड़के की माता, भाई अरविंद और मिथुन से किया तो लड़के को समझाने बुझाने के बजाए, मेरी लड़की को ही आवारा और बदचलन बनाते हुए मारने के लिए दौड़ा लिया। जिससे लड़के का मन बढ़ता गया। वह बराबर वीडियो वायरल करने का डर दिखा कर लड़की के साथ बलात्कार करता रहा। इसकी शिकायत पुलिस से भी किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया कि 19 जनवरी 26 को वह रिष्तेदारी में गई थी, तभी शक्तिमान घर के थोड़ी दूर पर खेत में मेरी लड़की के साथ गलत हरकत किया। जब मैं फिर लड़के के घर गई और रो-रो कर बताया, तो मुझे ही गाली देते हुए मारने के लिए दौड़ा लिया। इससे दुखी होकर मेरी लड़की ने 20 जनवरी 26 को घर में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। कहा कि वह फिर पुलिस के पास केस दर्ज करवाने के लिए गई, लेकिन केस दर्ज नहीं किया गया। कहा कि लड़की की मौत के बाद से ही न्याय पाने के लिए इधर-उधर भटक रही है। अधिवक्ता के जरिए तत्कालीन एसपी को दिए गए आवेदन में लड़की के मौत के जिम्मेदार अरविंद, मिथुन, शक्तिमान और उसकी माता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और न्याय दिलाने की मांग की। शक्तिमान का मोबाइल नंबर 7837584838 देते हुए कहा कि अगर इसका सीडीआर निकाला जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी। अब देखना यह है, कि क्या लालगंज की पुलिस नवागत एसपी के आदेश पर मुकदमा दर्ज करती है, या फिर पुराने एसपी के आदेश की तरह उसे रददी की टोकरी में डालती है।