बस्ती। जब विकास खंड बहादुरपुर के ग्राम पंचायत फूलपुर एक दिन में एक कार्य पर 144-144 दिन, सेखुपुरा में 87-87 और वैष्णोपुर में 60-60 फर्जी मस्टरोल निकलेगा तो ब्लॉक भ्रष्टाचार में नंबर वन बनेगा ही। वैसे तो सरकारी व्यवस्था में मनरेगा में प्रधानों की कोई जिम्मेदारी नहीं होती, लेकिन सबकुछ प्रधान ही करते हैं, प्रधान से प्रशासक भले ही बन गए, लेकिन इनके भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं आई, इसी लिए मीडिया बार-बार योगी सरकार और पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर को प्रशासक बनाए जाने का जिम्मेदार मानती है। अगर प्रष्टाचार तो नहीं होता, लेकिन जब सीएम ओैर मंत्री प्रशासकों को लूटने का मौका दे रही है, तो गांव की जनता क्या करें? मीडिया बार-बार इस बात को भी दोहरा रही है, कि बहादुरपुर ब्लॉक को भ्रष्टाचार की आग में किसी और ने नहीं बल्कि नकली प्रमुखों ने झांेका। रही सही कसर भ्रष्ट बीडीओ/पीआसे मनरेगा, एपीओ, सचिव, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायकों ने पूरा कर दिया, रही बात सीडीओ और डीसी मनरेगा की तो अगर यह लोग इतने ही ईमानदार होते तो जिले में पिछले पांच साल में पांच अरब से अधिक न खर्च हुआ था, आधे से अधिक का बटवारा हुआ है। इसका खुलासा कई बार हो चुका है। मनरेगा में बदलाव से भी भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ, बल्कि और बढ़ गया। मनरेगा को जिले के स्तरीय ने एक तरह से भ्रष्टाचारियों को सौंप दिया। इन लोगों की जेबें भरती जाए, भले ही मनरेगा लुट जाए। अनेक लोगों का दावा है, कि प्रशासक बनने से उतनी लूट नहीं मची थी, जितनी अब मची है। एक तरह से योगीजी से इन लोगों को लूटने का अवसर दे दिया। योगीजी प्रशासक बनाने का निर्णय प्रदेश के इतिहास में काले अक्षरों से लिखा जाएगा, ओमप्रकाश राजभर का क्या, आज वह योगी के साथ है, कल को अखिलेश के साथ में हो जाएगें। बहरहाल, जिले के जिम्मेदारों ने मनरेगा को नहीं बचा पाए, बचाने को कौन कहे, लूटने में लगे रहे।
आनलाइन हाजरी के अनुसार बहादुरपुर ब्लॉक के फूलपुर ग्राम पंचायत मंे लगभग 70 लाख की परियोजना की मंजूरी बीडीओ ने भारी कमीशन लेकर किया, लालजी शर्मा के खेत से पष्चित लुकसाबाद सरहद तक चकबंद निर्माण कार्य में 13 अगस्त 26 को 144 मस्टरोल निकाला गया, जब कि मौके की हकीकत कुछ और बयां कर रही है। सवाल उठ रहा है, कि जब यह प्रोजेक्ट इतना महत्वपूर्ण था, तो क्यों कि प्रधानी के कार्यकाल में कराया गया। इसी तरह सेखुपुरा ग्राम पंचायत में भानु के खेत के पास तालाब की जीर्णाद्यार के कार्यं 87 फर्जी मस्टरोल निकाला गया, वहीं वैष्णोपुर ग्राम पंचायत में जय सिंह के खेत से बलिराम के खेत तक चकबंद निर्माण के कार्य में एक दिन में 60 फर्जी मस्टरोल निकाला गया। इस फर्जीवाड़े की जांच न तो बीडीओ ने किया और न एपीओ ने, जबकि इन दोनों की जिम्मेदारी स्थलीय जांच करने की है। सवाल उठ रहा है, कि जब इन्हें ब्लॉक में बैठे-बैठे कमीशन मिल जाता है, तो क्यों स्थल देखने जाएगें। इन ग्राम पंचायतों के लोगों ने डीएम, सीडीओ और डीसी मनरेगा से जांच कराने और जारी मस्टरोल को जीरो करने के साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। मीडिया बार-बार यह कहती आरही है, कि क्यों नहीं आज तक किसी बीडीओ/मनरेगा पीओ के खिलाफ कार्रवाई की गई? अगर कार्रवाई कर देते तो मोटा लिफाफा मिलना बंद हो जाएगा। एक तरह से जिले के लोगों का खर्चापानी बीडीओ ही चलाते है। बहादुरपुर में बड़े बाबू शाहिद अली को कमीशन कलेक्टर कहा जाता है।
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