बनकटी/बस्ती। बार-बार ग्रामीण यह सवाल उठाते हैं, कि क्या डीएम से अधिक पावरफुल लेखपाल होता? क्या लेखपाल डीएम के आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं होता? लालची लेखपाल के चलते ही न जाने कितने जमीनी विवाद का निस्तारण नहीं पा रहा है, न जाने कितने लोगों ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लिया, और न जाने कितनो ने सरकारी जमीन के रास्ते पर कब्जाकर उसे बंद की दिया, जब भी इस तरह के मामले में डीएम लेखपाल को आदेश करते, कोई न कोई फर्जी रिपोर्ट लगाकर मामले को और अधिक विवादित बना देते है। इसी लिए कहा जाता है, कि किसी को डीएम के पास जाने की आवष्यकता नहीं, लेखपाल को उनका मेहनताना दीजिए, और चैन की नींद सोइए। इसी तरह का एक मामला बनकटी विकास क्षेत्र के ग्राम गौरी में सार्वजनिक रास्ता बंद किए जाने का सामने आया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस रास्ते पर सरकारी धन से खड़ंजा निर्माण कराया गया, उसी रास्ते को अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। शिकायत के बावजूद यदि आमजन का आवागमन बहाल नहीं कराया गया, ग्रामीण इसके लिए प्रशासनिक उदासीनता मान रहे है। सवाल यह है कि सार्वजनिक रास्ता बंद करने वालों को किसका संरक्षण प्राप्त है और जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद कार्रवाई कब होगी? ग्राम गौरी निवासी मनोज कुमार पुत्र राम वकील ने आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत भेजकर रास्ता तत्काल खुलवाने, मौके पर जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मनोज कुमार का आरोप है कि रास्ते पर पहले गेट लगाया गया था। उस समय ग्रामीणों को भरोसा दिया गया कि रास्ता सार्वजनिक रहेगा और गेट केवल रात में बंद किया जाएगा। लेकिन बाद में गेट हटाकर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया। शिकायतकर्ता और ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग से लंबे समय से लोगों का आवागमन होता रहा है। ऐसे में रास्ता बंद करना न केवल ग्रामीणों के अधिकारों का हनन है, बल्कि सरकारी धन से कराए गए निर्माण की उपयोगिता पर भी सवाल खड़ा करता है। प्रशासन को अब कागजी खानापूर्ति के बजाय मौके पर पहुंचकर रास्ता खुलवाना होगा। पूर्व ग्राम प्रधान अर्जुन तिवारी का कहना है कि उनके कार्यकाल में ग्राम पंचायत के उपलब्ध बजट से इस स्थान पर खड़ंजा निर्माण कराया गया था। उनका दावा है कि जिस जमीन पर खड़ंजा बिछाया गया, वह बंजर भूमि है। यदि यह दावा सही है, तो राजस्व अभिलेखों में जमीन की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए और यह भी जांच होनी चाहिए कि सरकारी धन से बने रास्ते को निजी तौर पर बंद करने की अनुमति किसने दी। सरकारी धन से बने सार्वजनिक निर्माण पर किसी व्यक्ति का कब्जा या अवरोध गंभीर मामला है, जिसकी तत्काल जांच जरूरी है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि संबंधित लेखपाल ने मौके पर पहुंचे बिना ही रिपोर्ट लगा दी। रिपोर्ट में दर्ज कुछ हस्ताक्षरों पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि कुछ हस्ताक्षर संबंधित लोगों के नहीं हैं और कुछ हस्ताक्षरकर्ताओं के ग्राम गौरी का निवासी होने पर भी सवाल है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया, मौके का निरीक्षण और हस्ताक्षरों का सत्यापन कराया जाना आवश्यक है। यदि रिपोर्ट बिना जांच के लगाई गई है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया की गंभीर चूक होगी। ग्रामीणों ने डीएम से राजस्व और पंचायत विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर तत्काल मौके का निरीक्षण कराने की मांग की है। जमीन के अभिलेख, खड़ंजा निर्माण से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड, ग्राम पंचायत के प्रस्ताव और लेखपाल की रिपोर्ट का मिलान किया जाए। दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए और जांच पूरी होने तक रास्ते पर किसी भी प्रकार का अवरोध न रहने दिया जाए। यदि रास्ता सार्वजनिक पाया जाता है, तो उसे तत्काल खुलवाकर आमजन का आवागमन बहाल कराया जाए। यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग, सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जे या रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए।