बस्ती। बार-बार सवाल उठ रहा है, कि आखिर कुदरहा के बीडीओ साहब क्यों इतना भ्रष्टाचारियों पर मेहरबान रहते हैं? आखिर यह भ्रष्टाचारी क्यों बीडीओ साहब को इतना प्रिय लगते हैं? अकेला कुबेरपुर के लोगों ने डीएम और सीडीओ से कहा कि आप लोग जरा इस गांव में में हो रहे भ्रष्टाचार को भी देख लें। यहां प्रधान और सचिव किस कदर सरकारी योजनों का धन ढकार रहे है, बताने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। गांव के सिवान में बने बकरी सेड ही इस बात को बताने के लिए काफी है। पशुचरन, सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवन का तो हाल मत पूछिए। यहां कुछ ही फोटो से पूरे वर्ष मनरेगा का काम होता रहा और हाजरी लगती रही ।क्योंकि यहां का रोजगार सेवक बाबू राम, ब्लाक मनरेगा आपरेटर अरविंद यादव की तरह मास्टर माइंड है। जो कमी थी उसे सचिव धनश्याम यादव और सेक्टर प्रभारी देवेंद्र यादव पूरा कर दिया हैं। तभी तो यहां शिकायत के बाद भी कागजों में मनरेगा मजदूरों की बस हाजरी लगती रही। जब मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचता तो वर्क आईडी शून्य कर मामले को निपटा दिया जाता है। इस खेल में कुदरहा बीडीओ का भरपूर सहयोग रहता है। क्योंकि यहां का रोजगार सेवक गलत कराने के लिए फाईलों के साथ केवल लिफाफा ही नहीं देता है। देशी मुर्गा और कुआनो नदी के मच्छली का स्वाद भी चखाता है। तभी तो शिकायतकर्ता कुछ भी नहीं उखाड़ पा रहे है
यहां तो बकरी सेड तक को नहीं छोड़ा गया है। बड़े पैमाने पर पहले लोगों के खाते में बकरी सेड का धन भेजवाया। इसके बाद लाभार्थी से झूठ बोलकर ले लिया। यदि किसी ने शिकायत करनी शुरू की तो आधा अधूरा बनवा कर छोड़ दिया। यह बात कोई और नहीं लाभार्थी खुद कह रहे है कि रोजगार सेवक बाबूराम मनरेगा का पैसा बताकर बकरी सेड का धन ले लिया है। उन्हें यह नहीं पता था कि उनके नाम पर योजना स्वीकृत करा कर इतना बड़ा फ्राड करेगा। जब इस बात की उन्हें जानकारी हुई तो वह शिकायत तो किए लेकिन वह लिफाफे और देशी मुर्गे के लेग पीस के आगे दब गया। गांव के लोगों ने शपथ पत्र के साथ शिकायत करके थक गए है। उनकी कोई नहीं सुन रहा है। एक ही फोटो सौ से अधिक मस्टर रोल पर दर्ज होने का सशपथ साक्ष्य भी दे चुके हैं। फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। यहां दो दर्जन से अधिक बकरी सेड पर धन की निकासी हुई है, लेकिन इसका बस बंदर बाट किया गया है। सामुदायिक शौचालय तक निष्क्रिय बना हुआ है। उसे तक संचालित नहीं किया जा रहा है। पंचायत भवन पर तो शायद ही कभी सचिव साहब आते हों। शिकायत करने पर उल्टा ही धमकी देते है। सचिव घनश्याम यादव और सेक्टर प्रभारी देवेंद्र कुमार यादव के कारनामें की बार मंझरिया में भी सामने आ चुका है। कागजों में चलवा रहे थे मनरेगा की हाजिरी, जब जांच टीम पहुंची तो एक भी नहीं मिले। यह खेला कई बार पकड़ में आ चुका है। फिर भी बीडीओ कुदरहा इनपर मेहरबान है।
0 Comment