बस्ती। भाकियू भानु गुट के पूर्वांचल प्रवक्ता चंद्रेश प्रताप सिंह ने केंद्र सरकार पर चीनी की कालाबाजारी रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव से पहले चंदे की आहट तो नहीं देश में पिछले एक महीने में चीनी के दाम 44-48 रुपये से बढ़कर 60-70 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। न गन्ना उत्पादन घटा, न मिलों में हड़ताल, न अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल फिर दाम क्यों बढ़े? उत्तर प्रदेश में गन्ने का आज भी 350 रु. क्विंटल, केंद्र का 315 रु. पर टिका है। किसान की लागत 15ः बढ़ी, पर दाम 1 रुपया नहीं बढ़ा। कई जिलों में पिछले सीजन का भुगतान अब तक बकाया है। गन्ने से सिर्फ चीनी नहीं, 20 से ज्यादा उत्पाद बनते हैं। चीनी, गुड़, शीरा, इथेनॉल, शराब, बिजली, कागज, बायो जैविक खाद, मोम, पशु चारा। 20 इथेनॉल ब्लेंडिंग के नाम पर केंद्र ने मिलों को बड़ा बाजार दे दिया। अब उन्हें चीनी बेचने की मजबूरी ही नहीं, इसलिए गोदामों में स्टॉक रोककर कृत्रिम किल्लत पैदा की जा रही है। बड़े ग्रुपों ने लाखों क्विंटल स्टॉक होल्ड किया है, पर केंद्र के पास स्टॉक लिमिट और छापे का अधिकार होते हुए भी एक भी बड़ी कार्रवाई नहीं। कुछ महीनों में कई राज्यों में चुनाव हैं क्या चीनी लॉबी की लूट पर चंदे के कारण आंखें मूंदी गई हैं?’पिस रहा है तो सिर्फ दो लोग-गन्ना उगाने वाला किसान और चीनी खरीदने वाला आम उपभोक्ता। तत्काल स्टॉक लिमिट लागू हो और जमाखोरों पर छापे मारे जाएं गन्ना मूल्य बढ़ाया जाए बकाया गन्ना भुगतान 15 दिन में सुनिश्चित किया जाए।