बस्ती। ब्राहृमण महासभा के अब तक के इतिहास में जो नहीं हुआ, अ बवह होने जा रहा है, अगर राष्टीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने समझदारी से काम नहीं लिया, और सही समय में कठोर निर्णय नहीं लिया, तो इतिहास पदाधिकारियों को कभी माफ नहीं करेगा। हालात बद से बततर बनते जा रहे हैं, लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है, और अब तो यह तक कहने लगे कि अब याचना नहीं रण होगा, पदाधिकारियों का ब्राहमण महासभा के सामने पुतला फूंका जाएगा। अगर यह सबकुछ हो गया तो समाज के सामने इसके जिम्मेदार क्या मुंह दिखाएगें? लोग पूछ रहे हैं, अगर कोई इतने गंभीर आरोपों के बाद इस्तीफा नहीं देता या फिर लोगों के सवालों का जबाव नहीं देता तो इसका मतलब आरोप या तो गलत हैं, या फिर चोरी और सीना जोरी जैसा है। अगर इतनी बदनामी और गंभीर सवालों का जबाव अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष सवाल पूछने वालों को कोई जबाव नहीं देते तो ब्राहृमण समाज इसे क्या समझें? सवाल उठ रहा है, कि आखिर किसी का जमीर क्यों नहीं जाग रहा है? और क्यों नहीं नैतिकता के नाम पर इस्तीफा दे रहे हैं? आखिर यह लोग चाहते क्या है? जो सवाल अब तक मकीडिया कर रही थी, अब वही सवाल जांच कमेटी के सदस्य तक करने लगें। पकड़ीचंदा वाले एमपी दूबे लिखते हैं, कि जिसका आडिट करना है, उसके लिए सभी कागजात उपलब्ध होना आवष्यक हैं, जैसे संस्था का नियमावली, छपी हुई सभी रसीदों का पूर्ण विवरण, कार्यालय प्रतियां, सभी खातों के बैंक विरण, पासबुक, बैंक संबधित सभी कागजात जैये चक बुक की प्रतियां, जमा कह प्रतियां, संस्था का लेजर, बिल बाउचर चाहिए। अब सवाल उठ रहा है, कि जांच कमेटी बनाने वालों को क्या यह नहीं मालूम था, कि बिना दस्तावेजों के टीम जांच कैसे करेगी? इसी लिए कहा जा रहा है, कि लोगों को जांच कमेटी के नाम पर लालीपाप दिया गया। राष्टीय कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों को यह अच्छी तरह मालूम हैं, कि इस तरह की जांच कमेटी क्यों और किस लिए बनाई जाती है, फिर ताली बजा आए।
प्रशांत पांडेय लिखते हैं, कि ब्राहृमण महासभा को अगले साल बेईमानी की सिल्वर जुबली भी मनानी चाहिए। 25 सालों से सफलता पूर्वक यहां के पदाधिकारी ब्राहृमण समाज को लूट रहे हैं, बेशर्मी की पराकाष्ठा हो गई, शर्म भी नहीं आती, महामंत्री सबकुछ जान रहे हैं, और आरोप भी साबिज हो चुके हैं, फिर भी गजब की बेशर्मी। सीधी सी बात चाहें आडिट हो या न हो, अंतिम निर्णय 30 को होना ही है, सबको पता है, कि चोर कौन है, सब मिले हुएं है। महामंत्री, कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ उपाध्यक्ष सब मिले हुए है। शर्म से डूब मरो ब्राहृमण महासभा के लुटेरों। जीजा और साले में क्या किसी ने इस्तीफा दिया? 30 तक चाहें आडिट करवानी है, करा लें, सीबीआई जांच करवानी हो करवा ले, राष्टीय कार्यकारिणी बस चोरों की संतुष्टि के लिए है। कहते हैं, कि अब भैया किसी की आज्ञा की जरुरत नहीं हैं, हम दिनभर वहीं जमंे रहेगें, फैसला हो चुका, अगर मीटिगं कैसिल हुई तो ब्राहृमण महासभा नई चुनौतियों के लिए तैयार रहें, कार्यकारिणी के पांचों पदाधिकारियों का गेट के सामने पुतला फूकां जाएगा, पूरे षहर में विरोध दर्ज कराया जाएगा, सम्मान समारोह के बाद से ही सामान्य सदस्यों और आजीवन सदस्यों को मूर्ख बनाया जा रहा है, बैठक रदद की जा रही है। सारे सवालों का जबाव 30 को लिया जाएगा और लेकर रहेगें, याचना नहीं अब रण होगा। लल्लू पांडेय लिखते हैं, कि डाक्टर साहब हमको लगता है, कि राष्टीय ब्राहृमण महासभा की बैठक बंद कमरे में हुई, जो विकास और उत्थान की शून्य से षिखर की वार्ता करने वाले पदाधिकारहीगण का हृदय इतना विषाल हैं, कि उन्हीं मंडली के राधेष्याम पांडेय और विजय बिहारी तिवारी ही बंद कमेरे की बैठक से संतुष्ट नहीं हैं। बड़ी बड़ी बाते करने वाले लोग ब्रसहृमण महासभा से जुड़ने वाले लोगों को कब तक गुमराह करते रहेगें, यह लोग समझ ले लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, कहीं ऐसा न हो कि चिंगारी शोला में बदल जाए। कहा कि ब्राहृमण महासभा से जुड़ा हर व्यक्ति अब तारीख नहीं निर्णय चाहता है। लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहास है, जिसका परिणाम घातक भी हो सकता है। जिसकी सारी जिम्मेदारी बंद कमरे में बैठक करने वाले पदाधिकारियों की होगी।
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