विश्व सनस्क्रीन दिवस पर सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ ने किया आयोजन
हापुड़, उत्तर प्रदेश:
सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ के त्वचा रोग विभाग द्वारा विश्व सनस्क्रीन दिवस के अवसर पर अत्यंत उत्साह एवं शैक्षणिक गरिमा के साथ एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाव, त्वचा स्वास्थ्य तथा निवारक त्वचा रोग देखभाल के प्रति जागरूक करना था।
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यह कार्यक्रम डॉ. दीप्ति सक्सेना, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, त्वचा रोग विभाग, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, हापुड़ के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें विभाग के संकाय सदस्यों, स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स, इंटर्न्स, मेडिकल विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. जे. रामचंद्रन, संस्थापक एवं चेयरमैन, सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस तथा रम्या रामचंद्रन, उपाध्यक्ष, सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, शैक्षणिक विकास एवं सामुदायिक कल्याण के क्षेत्र में उनकी दूरदर्शी सोच एवं निरंतर सहयोग ने संस्थान में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं तथा जन-जागरूकता अभियानों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों एवं प्रबंधन टीम का भी विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिनमें डॉ. बरखा गुप्ता, प्राचार्य, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़; डॉ. मेजर जनरल सी.एस. आहलूवालिया, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़; ब्रिगेडियर डॉ. आर.के. सहगल, सीनियर एडवाइज़र, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़; एन. वर्धराजन, जनरल मैनेजर, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़; तथा रघुवर दत्त, निदेशक, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ शामिल रहे। इनके सतत प्रशासनिक सहयोग एवं मार्गदर्शन से यह जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक आयोजित किया जा सका।
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इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को पराबैंगनी (यूवी) किरणों के लंबे समय तक संपर्क से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा सनस्क्रीन के नियमित उपयोग को एक महत्वपूर्ण निवारक स्वास्थ्य अभ्यास के रूप में बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों एवं त्वचा रोग विशेषज्ञों ने मरीजों एवं उनके परिजनों से संवाद करते हुए बताया कि लंबे समय तक बिना सुरक्षा के धूप में रहने से समय से पहले त्वचा में झुर्रियां आना, टैनिंग, पिगमेंटेशन, सनबर्न, त्वचा के रंग में असमानता, फोटोसेंसिटिविटी तथा दीर्घकाल में त्वचा कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. दीप्ति सक्सेना ने कहा कि सनस्क्रीन केवल सौंदर्य प्रसाधन नहीं बल्कि त्वचा को फोटो डैमेज एवं पर्यावरणीय प्रभावों से बचाने वाला एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय सुरक्षा उपाय है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां लोग वर्षभर लंबे समय तक सूर्य के संपर्क में रहते हैं, वहां सन प्रोटेक्शन के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान विभाग के संकाय सदस्यों एवं स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स द्वारा मरीजों एवं अस्पताल में आने वाले लोगों के लिए इंटरैक्टिव काउंसलिंग सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में सनस्क्रीन लगाने की सही विधि, उपयुक्त एसपीएफ (SPF) का चयन तथा बाहर रहने के दौरान समय-समय पर सनस्क्रीन दोबारा लगाने की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। चिकित्सकों ने सनस्क्रीन से जुड़ी सामान्य भ्रांतियों को भी दूर किया तथा बताया कि सनस्क्रीन का उपयोग हर मौसम एवं बादलों वाले दिनों में भी नियमित रूप से किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर त्वचा रोग विभाग द्वारा अस्पताल में आने वाले मरीजों एवं परिजनों के लिए विशेष सनस्क्रीन वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। लोगों को निःशुल्क सनस्क्रीन सैंपल वितरित किए गए ताकि वे त्वचा सुरक्षा के महत्व को समझें तथा स्वस्थ त्वचा बनाए रखने के लिए सनस्क्रीन के नियमित उपयोग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को सूर्य से बचाव के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की भी सलाह दी गई। प्रतिभागियों को सुरक्षात्मक कपड़े पहनने, धूप का चश्मा, छाता एवं टोपी का उपयोग करने तथा दोपहर के समय अत्यधिक धूप में जाने से बचने की सलाह दी गई। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को स्वस्थ त्वचा के लिए दैनिक जीवन में सही स्किनकेयर आदतें अपनाने हेतु प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान त्वचा संरक्षण से संबंधित जानकारीपूर्ण सामग्री एवं जागरूकता संदेश भी वितरित किए गए। यह आयोजन सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ की सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता, निवारक चिकित्सा, रोगी शिक्षा एवं जनस्वास्थ्य सेवाओं के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संस्थान समय-समय पर विभिन्न शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहता है, जिनका उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना एवं स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है।
अंत में त्वचा रोग विभाग द्वारा सभी संकाय सदस्यों, रेजिडेंट्स, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों का कार्यक्रम को सफल एवं प्रभावशाली बनाने में सक्रिय योगदान हेतु आभार व्यक्त किया गया।
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