बस्ती। कुदरहा के चौकी इंचार्ज शर्माजी कभी निलंबित न होते अगर, वह परेवा के राम प्रकाश यादव के भाई को बचाने के चक्कर में न पड़ते। शर्माजी ने तो एसीएसटी के मुकदमें से तो भाई को बचा लिया, लेकिन खुद शहीद हो गए, वह भी मामूली रकम में, यह भी सही है, कि अगर कुदरहा ग्राम पंचायत की प्रधान पूजा देवी के पति इंदर कुमार परेवा वाले का साथ न दिए होते और लड़की से समझौता न कराए गए होते तो आज भाई को जेल की हवा खानी पड़ती। भले ही चाहे समझौता कराने में दो लाख लग हो, लेकिन सौदा महंगा नहीं था। अब परेवा वाले कुदरहा के इंद्र कुमार का एहसान चुकाने के लिए परेवा वाले मदद कर रहे हैं, और षिकायतकर्त्ता उमेश गोस्वामी से बचाने के लिए मानमनौव्वल और खर्चा पानी लेने की बात कर रहें है। लेकिन शिकायतकर्त्ता कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं, जो व्यक्ति अभी तक किसी से समझौता न किया हो, और जो देवाजी तक को नाराज कर दिया, उसे कोई कैसे खरीद सकता है? जब सीएमओ और उनकी टीम नहीं खरीद सकी तो परेवा वाले कैसे खरीद सकतें? एक तरफ समझौते की बात कर रहे हैं, और दूसरी तरफ प्रधानजी उमेश गोस्वामी को धन उगाही करने वाला व्यक्ति भी बता रहे है। इन्हें धन उगाही का पेषा करने वाला तक डीएम को लिखकर दे चुकी है। कुदरहा ही नहीं पूरा जिला जानता है, कि उमेश गोस्वामी कभी समझौता नहीं करता, यही कारण है, कि मैडम डीएम इन्हंे अपना परमानेंट कस्टमर कहती है। अगर डीएम, उमेश को धन उगाही करने वाला समझती तो षायद कभी कार्यालय में घुसने नहीं देती। मीडिया भी बार-बार कहती आ रही है, कि अगर उमेश गोस्वामी जैसा दो चार और जिले में हो जाएं तो भ्रष्टाचार पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। मीडिया ने न जाने कितने शिकायतकर्त्ता को पल्टी मारते देखा, लेकिन उमेश गोस्वामी को नहीं देखा। कुदरहा जैसे इलाके में अगर उमेश गोस्वामी जैसा जाबांज शिकायकर्त्ता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला व्यक्ति हो तो वहां के लोगों को ऐसे व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए। यह सोचकर करना चाहिए, कि चलो कोई तो हैं, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ मुस्तैदी से लड़ रहा है। ग्राम पंचायत कुदरहा की प्रधान पूजा देवी ने उमेश गोस्वामी को धन उगाही करने की नीयत से शिकायत करने वाला बता कर यह साबित कर दिया कि जो जैसा होता है, वह दूसरों को भी वही समझता।

डीएम को लिखे पत्र में उमेश गोस्वामी ने कहा कि ग्राम पंचायत कुदरहा में बंजर की जमीन के गाटा संख्या 372 प्रधान पूजा देवी जो कि स्वंय भूमि प्रबंधन समिति की अध्यक्ष ने लेखपाल एवं पूर्व राजस्व निरीक्षक राकेश कुमार सिंह ने मिलकर कूटरचित तरीके से 24 जनवरी 20 को जुगुरता देवी पत्नी चंद्रिका प्रसाद अग्रहरि के नाम फर्जी तरीके पटटा कर दिया, जब कि जुगुरता के पास कुदरहा बाजार में लाखों का मकान बना है। लिखा कि इसी बीच 14 अगस्त 22 को जुगुरता की मृत्यु हो गई, मृत्यु होते ही प्रधान और उनके पति इंदर कुमार एवं उनके समर्थकों ने अग्रहरि की जमीन पर कब्जा करके मकान बना लिया। लाखों के लालच में राकेश सिंह ने प्रधान के साथ मिलकर करोड़ों की जमीन का फर्जीवाड़ा कर लिया। पत्र में बाबा का बुलडोजर चलाने और उक्त जमीन का उपयोग किसी सरकारी कार्य में करने की मांग की गई। मामले की जांच मजिस्टेट से कराने की मांग भी की गई।