बस्ती। सड़क से लेकर सदन तक कभी भ्रष्टाचार तो कभी पीड़ितों तो कभी जनहित को लेकर सत्ता में रहकर सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वाले एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के बारे में उनके विरोधी भी कहते हैं, कि नेता हो तो एमएलसी जैसा। बेसिक के हजारों शिक्षक तो इन्हें अपना मसीहा तक मानने लगे। जिस तरह सदन में इन्होंने हजारों पदोन्नति प्राप्त बेसिक के शिक्षकों के लिए पुनराक्षित वेतन मान देने पर सरकार को अपने तर्को के जरिए मजबूर किया और दस साल पुराने वेतन विसंगतियों को दूर करने का रास्ता साफ करवाया, उससे प्रदेश के 17 हजार से अधिक शिक्षकों को लाभ होगा। सदन में जिस बेसिक विभाग के मंत्री ने मामले को विचार करने से ही इंकार कर दिया था और यहां तक कहा कि इस तरह का कोई भी मामला विचाराधीन नहीं हैं, उसी मंत्री ने न सिर्फ विचार करने को कहा कि बल्कि एमएलसी के दिए गए सुझाव को मानने का भरोसा भी दिया। इस मामले में सदन के सभापति ने भी एमएलसी का पूरा साथ दिया, और मंत्री से कहा भी माननीय सदस्य जो सुझाव दे रहे हैं, उस पर आप विचार करें, और वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रयास करे, ताकि दस साल पुराने मामले का निस्तारण हो सके।

सदन के सभापति ने जैसे ही एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह का नाम लिया, वैसे ही उन्होंने कहा कि महोदय सरकार कोई भी नीति पूरे सवंर्ग के लिए बनाती है, न कि किसी खास के लिए। कहा कि पदोन्नति प्राप्त हजारों शिक्षकों को पुनरीक्षित वेतन मान का लाभ नहीं मिल रहा। कहा कि यह कैसी व्यवस्था हैें, जिसमें पहली दिसंबर 2008 से 21 सितंबर 2015 के मध्य पदोन्नति प्राप्त प्राथमिक शिक्षकों को पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ नहीं मिल रहा। कहा कि पहले वाले को मिल रहा है, और बीच वाले को नहीं मिल रहा। उन्होंने सभापति से कहा कि उनके पास वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए एक फारमूला हैं, कहा कि सरकार अगर इस फारमूले पर विचार करती है, तो दस साल पुराने समस्या का समाधान हो सकता है। उन्होंने नौ जून 2016 के शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट लिखा हुआ है, कि सरकार अगर चाहे जो पुनरीक्षित वेतन मान की विसंगतियों को दूर कर सकती है। इस पर सभापति ने मंत्री से माननीय सदस्य के सुझाव पर विचार करने और वेतन विसंगतियों को दूर करने को कहा। तब इस मंत्री ने कहा कि सरकार माननीय सदस्य के सुझाव पर न सिर्फ विचार करेगी बल्कि वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रयास भी करेगी। मंत्री के द्वारा सदन के सभापति को दिए गए आष्वासन से वेतन विसंगतियां दूर होने की संभावना बढ़ गई है। यह सही है, कि एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह जितना अपने वोटर्स के लिए और पीड़ितों के लिए लड़ते हैं, उतना अन्य जनप्रतिनिधि लड़ते हुए नहीं दिखाई देते, यही कारण है, कि कोई जीते या न जीते यह जरुर जीतते है। जिस तरह सत्ता में रहकर सत्ता का विरोध करके यह जीतते आ रहे हैं, उससे इनकी लोकप्रियता का पता चलता है। इन्हें इस बात की परवाह नहीं रहती है, कि वह पार्टी के सीएम के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहें है। इन्हें जब भी लगा कि सरकार गलत कर रही है, आवाज उठाने से नहीं चूकते। यह जब सपा में थे तब भी सरकार की जनहित विरोधी नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते थे, वही आवाज भाजपा में रहकर भी उठाते है। इनका मानना हैं, हर नेता को गलत नीतियों और गलत कामों का विरोध करना चाहिए, क्यों कि जनता ने उन्हें सरकार की जी हूजूरी करने के लिए नहीं चुना, बल्कि जनहित के मुद्वे को उठाने के लिए चुना। इसी लिए कहा जाता है।