बस्ती। ऐसा लगता है, कि रुधौली ब्लॉक को असली और नकली प्रमुखों ने मिलकर खूब गोलमाल किया। यह वही ब्लॉक हैं, जहां पर बैठक के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष की मौजूदगी में बीडीसी ने भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। विकास खंड रुधौली के ग्राम पंचायत करमकला में इंटर लॉकिंग निर्माण कार्यों में अनियमितता का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ऑनलाइन शिकायत के बाद हुई जांच में जहां निर्माण कार्यों में भारी खामियां मिलने की पुष्टि हुई, वहीं अब यह भी सामने आया है कि शिकायत सही पाए जाने के बावजूद संबंधित कार्य योजनाओं में भुगतान जारी रहा। इतना ही नहीं, मनरेगा से स्वीकृत कार्यों में 14वां वित्त आयोग और पंचम राज्य वित्त आयोग से भी धनराशि निकाले जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
शिकायतकर्ता मानवेन्द्र प्रताप सिंह ने 26 सितम्बर 2024 को ऑनलाइन शिकायत संख्या 40018524026050 दर्ज कर आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत करमकला में कराए गए इंटर लॉकिंग कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हैं और कई स्थानों पर सड़क उखड़ चुकी है। मामले की जांच तत्कालीन खंड विकास अधिकारी रुधौली द्वारा कराई गई, जिसमें शिकायत सही पाई गई। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि खड़ंजा से दुर्गा के घर तक बने इंटर लॉकिंग मार्ग में बिना बेसिंग कराए सीधे मिट्टी पर ईंटें बिछा दी गई थीं, जिससे सड़क कई जगह उखड़ गई। वहीं खड़ंजा से परशुराम के घर तक बने मार्ग में किनारों पर आवश्यक बेसिंग नहीं मिली और खुदाई में ईंटों के टुकड़े पाए गए। तीरथ के घर से राम बहादुर के घर तक बने मार्ग में भी मानकों के विपरीत कार्य मिलने की पुष्टि हुई। आरोप है कि शिकायत से पहले ही 14 सितम्बर 2024 को मनरेगा मद से तीन परियोजनाओं पर 4600, 4600 और 2760 रुपये का भुगतान बिना कार्य कराए ही कर दिया गया था। शिकायत और जांच के बाद उम्मीद थी कि भुगतान रोका जाएगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामला शांत होते ही कागजों में पुनः कार्य दर्शाकर दोबारा भुगतान निकाल लिया गया। ताजा आरोपों के अनुसार वर्ष 2026 में भी उन्हीं कार्य योजनाओं पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया। खड़ंजा से दुर्गा के घर तक इंटर लॉकिंग कार्य के नाम पर 14वें वित्त आयोग से 1,18,565 रुपये तथा अन्य मद में 3,107 रुपये निकाले गए। वहीं तीरथ के घर से राम बहादुर के घर तक इंटर लॉकिंग कार्य हेतु पंचम राज्य वित्त आयोग से 1,07,255 रुपये और 2,997 रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा खड़ंजा से परशुराम के घर तक बने मार्ग में सामग्री प्रयोग के नाम पर भी धनराशि निकाले जाने का आरोप लगाया गया है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब तत्कालीन खंड विकास अधिकारी की जांच में शिकायत सही पाई गई थी, तो फिर उन्हीं कार्य योजनाओं पर भुगतान कैसे जारी रहा। साथ ही जब कार्यों की स्वीकृति मनरेगा योजना से हुई थी, तो 14वें वित्त आयोग और पंचम राज्य वित्त आयोग से भुगतान किए जाने को लेकर भी गंभीर वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण शिकायत और जांच रिपोर्ट के बावजूद भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लग सकी। गांव के लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और निकाली गई धनराशि की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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