
बस्ती। महादेवा के विधायक दूधरामजी सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता के साथ जिस तरह समझौता कर रहें हैं, उससे लगता है, कि इन्हें समझौता करने का मौका षायद फिर न कभी मिले। इसी लिए क्षेत्र की जनता कह रही है, कि विधायकजी जितना चाहिए, लूट लीजिए, पता नहीं फिर कभी लूटने का मौका मिले या न मिलें। अगर विधायक निधि की सड़क का उदघाटन विधायकजी करते हैं, और उदघाटन के दूसरे दिन ही सड़क टूट जाती है, और जिसे छिपाने के लिए पालीथीन लगाया जाता है, तो समझा जा सकता है, कि विधायकजी गुणवत्ता के साथ कितने बड़े समझौतावादी है। जिस सड़क का उदघाटन विधायकजी ने किया, उस पर जो उदघाटन का शिलापट लगा हुआ है, उसमें न तो सड़क की लागत लिखी गई, और न उदघाटन की तिथि ही लिखी गई, लगता है, कि हर बार की तरह इस बार भी क्षेत्र के पत्रकार लिफाफा मिल जाने के कारण विधायकजी से यह सवाल नहीं किया कि विधायकजी सड़क कैसे दूसरे दिन टूट गई? और क्यों नहीं शिलापट पर लागत और तिथि लिखा। नूरचक के निवासी पवन वर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘नूरचक चौराहा से सियाराम के चक’ तक तक जो पिच रोड़ बनाया गया, वह उदघाटन करते ही धरासाई हो गया। लिखा कि दरार को छिपाने के लिए पालिथीन बिछाए जा रहे है। लिखते हैं, कि बेचारा ठेकेदार क्या करे, जब विधायकजी ने 50 फीसद कमीषन ले लिया होगा। लिखते हैं, विधायकजी के इस कमीशनबाजी के चक्कर में जनता गुणवत्तापरक सड़क पर चलने को तरस रही है। कहते हैं, कि ऐसे भ्रष्ट विधायक, ठेकेदार और कार्यदाई संस्था आरईडी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। विधायकजी को ऐसा लगता है, कि लिफाफे लेने वाले पत्रकार उन्हें बदनामी से बचा लेंगें। लेकिन विधायकजी को यह नहीं मालूम कि आजकल जिस भी व्यक्ति के पास मोबाइल हैं, वे सभी पत्रकार हो गए है। आप लिफाफा देकर कुदरहा क्षेत्र के पत्रकारों का तो मुंह बंद कर सकते हैं, लेकिन पवन वर्मा जैसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले का मुंह कैसे बंद करेगें। विधायकजी अभी भी समय है, अगर फिर से विधायक बनना है, तो 50 फीसद कमीशन लेना बंद करना होगा, क्षेत्र की जनता जान चुकी हैं, कि आप सड़कों में कितना कमीशन लेते है। अगर कमीशन नहीं लेते तो सड़क की गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं करते, और जिसने भी घटिया सड़क निर्माण किया उसके खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराते। यह काम आप ने तब नहीं किया जब पुलिया बनते ही ढ़ह गई थी। विधायकजी सीएम से मिलने का मतलब यह नहीं कि आप ईमानदार हो गए, अगर वाकई ईमानदार जनप्रतिनिधि बनना है, जनता को लगना चाहिए कि आप ईमानदार नेता है। दिखावे के लिए ईमानदार मत बनिए। आप माने या न माने जो ठेकेदार आपके साथ मिलकर सरकारी धन को लूट रहे हैं, वही आपके हार का कारण बनेगे। ठेकेदार अपने फायदे के लिए ‘तुम नहीं तो और सही’ का फारमूला सालों से इस्तेमाल करता आ रहा है। आज आप हैं, कल को उसके लिए कोई दूसरा होगा। नुकसान तो आप का होगा, ठेकेदार का नहीं। यह बात जितनी जल्दी समझ लें, उतना आपके लिए अच्छा होगा। इस लिए ठेकेदारों से जितना भी दूर रहिए, उतना आपके राजनैतिक भविष्य के लिए अच्छा होगा। यह कीमती सुझाव लिफाफा लेने वाला कोई पत्रकार नहीं दे सकता।
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