बस्ती। रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दसिया में निर्माण हो रहे एथेनाल की फैक्टी का विरोध करने वाले नेताओं को सोशल मीडिया पर खूब टोल हो रहा है। बहस जारी है। कहा जा रहा है, कि विरोध करने और रील बनाने के पीछे नेताओं का मकसद पैसा कमाना या फिर उल्लू सीधा करना, नेता पहले विरोध करते हैं, और बाद विरोध बंद कर देते हैं, क्यों बंद कर देते है, इसे जनता अच्छी तरह जानती है। विरोध करने वाले नेताओं से पूछा जा रहा है, कि भाई फैक्टी बनने से पहले क्यों नहीं इसका विरोध किया, जब फैक्टी बनकर लगभग तैयार हो गई, तब विरोध करने का क्या मतलब, विरोध करने वाले भाजपा के नेताओं को यह नहीं मालूम कि इस फैक्टी का एमओयू योगीजी ने किया, है, किसी भाजपाई की हिम्मत हैं, जो इस फैक्टी को बंद करवा सकें। सालों बाद जिले में कोई इतनी बड़ी फैक्टी का निर्माण हो रहा है, उसका भी नेता विरोध कर रहे है। नेताओं के विरोध करने का मतलब जिले के विकास का विरोध करना, खुद तो लूटने के आलावा और कुछ किया नहीं, जो कर रहा है, उसका भी विरोध कर रहे है। विरोध करने वाले नेताओं को अच्छी तरह मालूम हैं, कि वह अपने मकसद में कभी कामयाब नहीं हो पाएगे, क्यों कि यह मामला विकास और रोजगार से जुड़ा हुआ हैं, सिर्फ आशंकाओं के आधार पर विरोध करने का मतलब भाजपा की नीति का विरोध करना।
भाजपा नेता मनमोहन श्रीवास्तव उर्फ काजू लिखते हैं, इससे कई लोगों को रोजगार मिलता, लेकिन जब भाजपा के नेता ही नहीं चाह रहे हैं, तो लोगों को रोजगार मिलेगा तो कैसे मिलेगा? सुभाषचंद्र मिश्र लिखते हैं, कि विरोध तो वही कर रहा हैं, जिसका भाजपा ़और पूर्व सांसद बस्ती सेवक हररीष द्विवेदी जी ने जिले का प्रथम नागरिक बनाया। यही है, संजय चौधरी, सब लोग पैसा खोज रहे हैं, अभी पैसा मिल जाए तो सब विरोध मिनटों में समाप्त हो जाएगा। आदित्य मिश्र लिखते हैं, कि पैसा लेकर विरोध बंद हो जाएगा। अखिलेष षुक्ल कहते हैं, कि इन लोगों से विकास से कोई लेना देना हैं, लोगों के पास बिरादरी है, जिस पर फल रहे है। सुधांसु त्रिपाठी लिखते हैं, कि विकास का विरोध केवल आषंकाओं के आधार पर नहीं बल्कि तथ्यों पर होना चाहिए, बस्ती के युवकों को रोजगार चाहिए, किसानों को बेहतर बाजार चाहिए और जिले को औधोगिक विकास चाहिए। संतोष गोेस्वामी कहते हैं, कि अगर यंवा नौकरी करने लगेगा तो जाति के नाम पर राजनहति करने वालों की रोजीरोटी कैसे चलेगी? अतुल उपाध्याय लिखते हैं, कोई चाहें जितना विरोध कर ले, एथेनाल की फैक्टी बन चुकी है, और यह चलकर ही रहेगी, कोई कुछ नहीं उखाड़ पाएगा। पांडेय दुर्गा दत्त कहते हैं, कि विरोध तो होना ही नहीं चाहिए, यह तो क्षेत्र एवं साताजिक हित की बात है। अकाष जगनरायन आर्य कहते हैं, कि यह बनेगा भी और चलेगा भी, फैक्टी बनाने वाला नेताओं को मैनेज करना जानते है, बाकी नेतागिरी चमकनी चाहिए, चाहें जैसे। चित्रसेन चर्तुेवेदी कहते हैं, यह सब कुछ राजनीति चमकाने के लिए हो रहा है, क्यों कि नेताओं के साथ विरोध करने वाले 90 फीसद पीने वाले घूम रहे है। रवि पांडेय कहते हैं, एक तो बस्ती में कोई फैक्टी नहीं, कुछ नेताजी मीडिया हेडलाइन बनने के लिए अजग गजब दलीलें दे रहे है। विपिन राजपूत लिखते हैं, कि सब रील बाजी करके पैसा कमाना चाहते हैं, किसी को कुछ नहीं पता कि क्या होगा?, कैसे होगा, बस रील बनाते जाओ। आयुष शुक्ल लिखते हैं, कि भाजपा के जिलाध्यक्ष खुद विरोध कर रहे, फिर और किसी की क्या बात करना। सुनील कुमार गुप्त कहते हैं, कि जितनेे लोग विरोध कर रहे हैं, उनमें शिक्षा का अभाव, वरना कोई पढ़ा लिखा नेता उधोग लगने का विरोध नहीं करता। अभय श्रीवास्तव लिखते हैं, कि जो लोग ज्ञापन देने गए हैं, उन्हें पूरा कमीषन दिया जाएगा, ताकि कुछ बोल न सके। अमरदीप लिखते हैं, कि नेता पहले विरोध करते हैं, फिर पैसा लेकर चुप हो जाते। अमित प्रताप सिंह राहुल लिखते हैं, कि हो हल्ला मचाकर कुछ माल समेटने वाले विरोध करेगें। मीरापुर वाले अंकित मिश्र कहते हैं, कि तेजी से चढ़ने वाले लोग बहुत तेजी से मैनेज हो जाते है। मनीष सोनी लिखते हैं, कि जहां फायदा है, वहां कुछ न कुछ तो नुकसान होगा ही, बाकी रोजगार से उस क्षेत्र का विकास ही होगा। अशोक पांडेय लिखते हैं, कि इन सबको थोड़ा माल मिल जाएगा, वुप हो जाएगें। सतीश कुमार लिखते हैं, कि भईया सब 50 रुपये का खेला है, सभी शाम का इंतजाम करने में लगें है। आयुष पांडेय कहते हैं, कि कमीशन नहीं पाए नेतालोग, दलाली नहीं मिली होगी। रणविजय सिंह सोनू लिखते हैं, कि जितना अहधक उधोग लगेगा उतना ही क्षेत्र का विकास होगा। एचके मिश्र लिखते हैं, कि अभी पार्टनर बना ले सारा विरोध समाप्त हो जाएगा। मनीष तिवारी लिखते हैं, कि विरोध करने वाले दोनों नेताओं ने बस्ती के लिए क्या किया लूटे है, बस्ती को।
0 Comment