बस्ती। अगर गांजा तष्कर दुर्गेश सोनकर और रवि गुप्त का साथ नेताओं का नहीं मिलता तो आज हर्रैया और अन्य क्षेत्र के हजारों स्कूली लड़कें और नवयुवक नषे के आदी न होते और न उनका जीवन ही बर्बाद होता। एक तरह बच्चों की बर्बादी के लिए हर्रैया के नेताओं का बहुत बड़ा योगदान है। इसी लिए नौजवानों की बर्बादी के लिए नेताओं को जिम्मेदार माना जा रहा है। कहना गलत नहीं होगा कि नेताओं का साथ पाकर ही आज यह दोनों गांजा तष्कर लाखोें नहीं बल्कि करोड़ों में खेल रहे है। कभी दोनों एक साथ मिलकर काम करते थे, लेकिन विवाद होने और जल्दी से जल्दी अमीर बनने के चक्कर में अलग हो गए। अलग होने में भी नेताओं का हाथ रहा। हालत यह हो गई, कि दोनों तष्करों के बीच गैंगवार हो रहा है, एक दूसरे का अवैध कारोबार को समाप्त और बर्बाद करने को लेकर न सिर्फ माल पकड़वा रहे हैं, बल्कि एक दूसरे गैंग के आदमियों को जेल भी भेजवा रहे है। छिंदवाड़ा पुलिस ने जिस तरह दुर्गेश सोनकर गैंग का माल और उसके आदमियों को पकड़ा, कहा जाता है, कि इसके पीछे रवि गुप्त गैंग का हाथ है। इसकी रेकी रवि गुप्त के लोगों ने की, उड़ीसा से माल निकलने  और महाराष्ट बार्डर पहुंचने तक पहुंचने में रवि गुप्त के लड़के रेकी करते रहे। जिसका परिणाम छिंदवाड़ा में 320 किलो गांजा और दुर्गेश सोनकर के भाई सहित चार की गिरफतारी रही। माल और आदमी पकड़वाकर एक तरह से रवि गुप्त ने दुर्गेश सोनकर से उसका बदला ले लिया, जिसमें दुर्गेश ने कावंड़िया के दौरान रवि गुप्त का माल और उसके आदमियों को पकड़़वाया था। कावंड़िया में सबसे अधिक माल और आदमी रवि के ही पकड़े गए थे। दुर्गेश का माल और उसके आदमियों को पकड़वाकर रवि के लोग बहुत खुश है। चूंकि रवि गुप्त जेल में हैं, इस लिए इस खुशी में वह शामिल नहीं हो सका। उधर दुर्गेश सोनकर और उसके खेमे में मायूसी छाई हुई है। पता चला कि दुर्गेश अपने भाई कृष्ण कुमार, शुभम सिंह सहित अन्य को जमानत पर बाहर लाने के लिए छिंदवाड़ा रवाना हो गया है। खासबात यह है, कि विधानसभा के चुनाव में भाजपा को सबसे अधिक वोट दुर्गेश सोनकर वाले बूथ पर ही मिला था। कहा जाता है, कि अगर पुलिस ने कठोर कार्रवाई नहीं की, तो खूनी खेल भी हो सकता हैं, क्यों कि अब तो ‘तुमने हम्हें बर्बाद किया, हम तुम्हें बर्बाद’ करने के तर्ज पर लड़ाई हो रही है। इन दोनों की पकड़ अगर भाजपा में नहीं होती तो रवि गुप्त सभासद मनोनीत नहीं होता और न दुर्गेष की पत्नी मनीशा सभासद बन पाती। यह जानते हुए कि दोनों गांजा तष्कर हैं, ओर बड़े पैमाने पर गांजे की तष्करी करते हैं, फिर एक को टिकट तो दूसरे को सभासद मनोनीत कर दिया। इस गैंगवार में नुकसान तो दोनों तष्करों का हो रहा है, लेकिन फायदा पुलिस का हो रहा है। धंधे चले तब भी और न चले तब भी हर माह 25 हजार छावनी और हर्रैया पुलिस को मिलना ही है। छावनी में दो और हर्रैया में पांच प्वाइंट हैं, जहां से हर माह लगभग एक लाख 75 हजार का लाभ पुलिस को मिलता।

अब हम आपको कुछ ऐसी बाते बताने जा रहें हैं, जो सही भी हो सकती और गलत भी, अधिक सही इस लिए हो सकती है, क्यों कि जो जानकारी दी गई, उसे किसी और ने नहीं बल्कि दोनों गैंग के एक सदस्य ने दी, इस लिए यकीन किया जा सकता है। सबसे पहले हम आपको यह बता दें कि इससे पहले विक्रमजोत पुलिस चौकी प्रभारी जय प्रकाश दूबे ने बजरंगी सिंह ढ़ाबा पर एक डीसीएम से लगभग दस क्ंिवटल गांजा बरामद किया था, और यह माल रवि गुप्त का बताया गया, खासबात यह है, कि मीडिया के कवरेज में 50-50 किलो के 20 बोरी दिखाया गया, लेकिन जब पुलिस ने प्रेसवार्ता किया तो उसमें सिर्फ आठ बोरी यानि चार क्ंिवटल बताया गया, छह क्ंिवटल गांजा कहां चला गया, आज तक किसी को पता ही नहीं चला। इस माल को किसी और ने नहीं बल्कि ढ़ाबा वाले ने ही पकड़वाया था। राजकिशोर सिंह जब मंत्री थे, तो उसी समय दुर्गेश सोनकर उनके खेमे में चला गया, उस समय उसकी खूब चलती थी, इसका विक्रमजोत, हर्रैया, बबुरहवा, कप्तानगंज और दुबौलिया मोड़ पर छह भांग की दुकाने चलती थी, लाइसेंस तो भांग का था, लेकिन उसी के आड़ में यह गांजा का भी कारोबार करता था, मंत्री होने के लगभग ढ़ाई साल तक इसका अवैध कारोबार खूब फलाफूला। तब दोनों एक ही गोल में थे, मामला उस समय बिगड़ा जब मंत्री ने दुर्गेश सोनकर से नगर पंचायत के चुनाव में राजेंद्र गुप्त की मदद करने को कहा, लेंकिन मदद करने के बजाए विरोध करना षुरु कर दिया। जिसके चलते इसका अवैध कारोबार लगभग दो-तीन साल तक बंद रहा। इसी बीच रवि गुप्त, राजकिशोर सिंह के खेमे में चला गया, और इसने राजेंद्र गुप्त की मदद की, जिसके चलते वह चेयरमैन बने। उसके बाद रवि गुप्त को दो एनएच और तीन प्रमुख मार्ग जैसे बभनान, विशेषरगंज और अमारी मोड़ का अडडा मिल गया। यह अडडा पहले दुर्गेश के पास था, जब मंत्रीजी हारे तो दुर्गेष सोनकर विधायकजी के खेमे में चला गया। इसके बारे में कहा जाता है, कि जब रैली या फिर अन्य कार्यक्रम के लिए भीड़ की जरुरत पड़ती तो यह मैनेज करता। पोस्टर बैनर तक की जिम्मेदारी इसके पास रही। गांजा की तष्करी और नेताओं का साथ ने दोनों तष्करों के कारोबार को पांच गुना अधिक बढ़ा दिया, भले ही चाहें हजारों नौजवान बर्बाद ही क्यों न हो रहे है।