बस्ती। सर्विस प्रोवाइड करने वाली ब्लैक लिस्टेड कंपनी अवनि प्रधि को अगर प्रेमबहादुर सिंह और सीएमओ मिलकर ठेका देंगे तो विरोधी आवाज तो उठाएगें ही, आवाज उठाने वाले विरोधी बाहर का कम और अंदर के अधिक होते है। जब से प्रमोद कुमार मिश्र गोरखपुर से सीएमओ कार्यालय के यहां दुबारा ज्वाइन किया, तब से प्रेमबहादुर सिंह की प्रेमगाथा बाहर आने लगीं। कहना गलत नहीं होगा, कि प्रेमबहादुर सिंह के साम्राज्य को समाप्त करने के लिए प्रमोद कुमार मिश्र को लाया गया। इनके आने से सबसे अधिक नुकसान प्रेम बहादुर सिंह का ही होने वाला हैं, इनके पिछले सभी काले कारनामों का खुलासा धीरे-धीरे हो रहा है। यह जानते हुए कि जय कांस्टक्षन को 80 लाख का काम एक साथ नहीं दिया जा सकता, फिर भी इन्होंने भारी कमीशन के लालच में जो पत्रावली प्रमोद कुमार मिश्र को चलानी चाहिए, उसे इन्होंने चलाया। सीएमओ और पीडब्लूडी को गुमराह करके अनुमति लेने का प्रयास किया। अब तो अधिकार को लेकर दोनों बाबूओं में ठनी हुई हैं। अगर कमीषन के लालच में सीएमओ और प्रेमबहादुर सिंह ने मुंडेरवा सीएचसी के 80 लाख के मरम्मत का कार्य जय कांस्टक्षन को दे दिया, तो सीएमओ के साथ प्रमोद कुमार मिश्र भी फंसेगें, यह इस लिए फंसेगें क्यों कि पटल इन्हीं के पास हैं, भले ही पत्रावली नियम विरुद्व प्रेम बहादुर सिंह ने चलाया, लेकिन जबाव तो इन्हें भी देना पड़ेगा।

अब एक नया मामला सामने आ गया है। 2020-21 में प्रेमबहादुर सिंह ने सीएमओ को भरोसे में लेकर या फिर उन्हें गुमराह करके अवनिप्रधि नामक सर्विस प्रोवाइड करने वाली फर्म को लगभग 300 एलटी, फार्मासिस्ट और नर्स की नियुक्ति करने का आर्डर करवा दिया। जबकि यह फर्म 2016-17 में ही शासन स्तर पर ब्लैक लिस्टेड हो चुकी है। जाहिर सी बात जिसे षासन ने ब्लैक लिस्टेड किया हो, अगर उसे 300 कर्मियों की नियुक्ति करने का आदेष दिया जाता है, तो सवाल भी उठेगें और पूछा भी जाएगा, कि भाई कितना कमीशन लिया कि ब्लैक लिस्टेड फर्म को आउटसोर्सिंगं का ठेका दे दिया। इस कहानी में तब टयूस्ट आया, जब इन लोगों को वेतन देने का मामला सामने आया, अभी तक वेतन का पटल प्रेमबहादुर सिंह के पास था, लेकिन अब यह पटल प्रमोद कुमार मिश्र के पास है। इस लिए हस्ताक्षर तो प्रमोद मिश्र का ही होना है, जब इसके लिए मिश्रजी से कहा गया तो उन्होंने पत्रावली उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके चलते 300 कर्मियों का वेतन नहीं मिल सका। पत्रावली मांगने के पीछे प्रमोद की मंशा उस पत्रावली में यह जानना है, कि किसके आदेश पर ब्लैक लिस्टेड फर्म को इतना बड़ा काम दिया गया, चूंकि दोनों बाबूओं में तनातनी चल रही है, इस लिए पत्रावली नहीं दी जा रही है, पत्रावली देने का मतलब प्रेम बहादुर सिंह का राज खुलना। अब आप लोग समझ गए होगें कि क्यों प्रेम बहादुर सिंह की प्रेम गाथा, लिखी जा रही है। एक तरह से अजय मिश्र, प्रेम बहादुर सिंह, संदीप राय और प्रमोद कुमार मिश्र मिलकर सीएमओ और उनके कार्यालय को पूरी तरह अपने कब्जे में ले रखा है। सीएमओ इस लिए कुछ नहीं करते क्यों कि इन्हें पैसा चाहिए। इसी लिए किसी ने सीएमओ से कहा था, कि अगर बचना है, तो प्रेमबहादुर सिंह से प्रेम मत करिएगा, संदीप राय से राय मत लीजिएगा और अजय मिश्र से दूर रहिएगा।