बस्ती। अब तो बस्ती वालों को तेलगाना प्रदेश के लोग भी ठगी का शिकार बनाने लगें। जिसको देखो वही बस्ती के लोगों को ठग कर चला जाता है, और वह भी नौकरी के नाम पर। ऐसा लगता है, कि मानो दूसरे प्रदेश के लोग बस्ती वालों को अधिक मूर्ख समझते हैं, अगर न समझते तो एक ही मीटिगं में दो भाईयों के झांसे में आकर छह लाख न देते। साइबर क्राइम ब्रांच में थाना पुरानी बस्ती के भरतपुर निवासी नंदलाल पुत्र रामदेव की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया कि 20 फरवरी 26 को अर्श फेमिली रेस्टोरेंट में गार्नीपूड़ी सतीश पुत्र गार्नीपूड़ी थमैया नायडू निवासी राजौरी जिला ईस्ट गोदावरी आंध्र प्रदेश एवं बीटीसी तिरुमला गिरी हैदराबाद ने अपने साथी राघव के मीटिगं किया, मेरे साथ रमेष यसदव, लक्ष्मन, सोनू एवं अषोक को ब्रीफ करते हुए बताया कि मैं मदर एजुकेशनल सोसायटी का अध्यक्ष हूं, और भर्ती मेरे द्वारा ही की जाएगी। 30 हजार सैलरी बेस पर कर्मचारी नियुक्ति कर लिया और कहा कि जितने कैंडिडेट की डिजिटल अािस्टेंड की नियुक्ति कराओ तो प्रति दिन पेटोल और भोजन के नाम पर 500 रुपया मिलेगा। जिसके बहकावे में हम लोग आ गए। जनपद महराजगंज में रुपेष कुमार पुत्र लोचन प्रसाद को बहला फुसला कर आठ हजार पर नौकरी देने के नाम पर सोसायटी के खाते में 55 हजार, सौरभ चौहान पुत्र श्रीनिवास ने 40 हजार, रजत सिंह से 55 हजार, शुभम पांडेय से 55 हजार, विनीत कुमार सिंह से 55 हजार कंचनलता से 55 हजार, जितेंद्र कुमार से 55 हजार, अजय कुमार से 55 हजार, कैलाष कुमार से 55 हजार, रोहित कुमार से 44500, संतराम से 55 हजार, मुकेश यसदव से दस हजार सहित कुल छह लाख ठग लिया। अब आप समझ सकते हैं, कि बस्ती में किस तरह बाहर के लोग आकर बस्ती के लोगों को बेवकूफ बनाकर ठग कर चले जाते है। ऐसा लगता है, कि मानो मीडिया के बार-बार लिखने का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। सवाल उठ रहा है, कि जब बस्ती वाले ठगी का षिकार होने को तैयार है, तो लोग उन्हें ठगेंगे ही।