बस्ती। जब आय से अधिक मामले में पीडब्लूडी अधीक्षण अभियंता कार्यालय में कार्यरत प्रेमचंद्र के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित हो सकती है, तो फिर क्यों नहीं टेंडर बाबू पटटू के खिलाफ कार्रवाई हो रही है,? आखिर कौन लोग हैं, जो ऐसे भ्रष्ट टेंडर बाबू को बचाने में लगे हैं, जिन पर प्रेमचंद्र से अधिक गंभीर आरोप लगे हुए है। जिस टेडर बाबू पर विदेष यात्रा को छिपाने और अपने भाई का पंजीयन कराने के मामले में निलंबित होना चाहिए, उसे अधिकारी और उनके आका नेता बचाने में लगे हुएं है। अधिकारी बचाने के लिए 14 मई और 27 मई 26 के बीच बिना सरकार की अनुमति के किए गए विदेश यात्रा के मामले में अब अनुमति ले रहे हैं। सवाल उठ रहा है, कि क्या विभाग बैक डेट में अनुमति देगा? संजय सिंह पगार और पटटू के साहब माने या न माने लेकिन पटटू दोषी हैं, और उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए। क्यों कि इन्होंने सरकार को धोखा दिया है? यह पिछले लगभग 16 साल से एक ही काउंटर पर है, लेकिन कोई देखने वाला नहीं, क्या इनपर तबादला नीति लागू नहीं होता? भले ही आज पटटू का स्टार फेवर हो लेकिन एक न एक दिन इन्हें अपने किए की सजा भुगतनी ही पड़ेगी। ठेकेदार एसोसिएशन की शिकायत पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब भी पटटू के खिलाफ कार्रवाई की बारी आती है, तो संजय सिंह पगार जैसे आका इनके बचाव में खड़े हो जाते हैं, चूंकि इनके पास पैसे की कोई कमी नहीं हैं, इस लिए यह पैसा खर्च करने में भी पीछे नहीं रहते हैं, और इनका विभाग बिकने के मामले में पैसे भी नंबर वन है। जिस विभाग में प्रहरी एप्प को बेचा जाता हो, टेंडर बेचा जाता हो, उस विभाग में पटटू जैसे लोगों का ही जन्म होगा।
अब जरा हम आपको ठेकेदार एसोसिएशन बस्ती के द्वारा 14 जून 26 को प्रमुख सचिव पीडब्लूडी को लिखे उस शिकायती पत्र की ओर ले चलता हूं, जिसमें कहा गया कि प्रभात कुमार उर्फ पटटू अधीक्षण अभियंता के यहां पहली नवंबर 2010 से अनवरत कार्यरत है। इस दौरान इन्हें दो पदोन्नति मिली, फिर भी यह यहीं पर जमे रहें, जबकि पदोन्नति के बाद इन्हें किसी और जनपद में चले जाना चाहिए था। चीफ इंजीनियर के द्वारा इन्हें प्रधान सहायक पर पदोन्नत किया, आदेष में स्पष्ट लिखा था, कि इनकी नवीन तैनाती पृथक से की जाएगी। जिसका पालन आज तक नहीं हुआ। लिखा कि जब से आन लाइन टेंडर प्रक्रिया षुरु हुई, तब से यह टेंडर बाबू का काम देख रहे है। इनकी निपुणता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि यह ई-टेंडर साइट पर लागिन करके देखते रहते हैं, कि किस टेंडर में कितनी निविदा प्राप्त हुई, जिस टेंडर में प्रतिस्पर्धा कम होती है, वहां यह अपने चहेतों ठेकेदारों से सांठगांठ करके निविदा डलवा देते हैं, और 10 फीसद कमीशन ले लेते है। इस तरह इन्होंने अवैध कमाई के जरिए अपनी पत्नी के नाम लगभग डेढ़ करोड़ के बाजारी कीमत पर जमीन खरीदा जो मानव संप्रदा पोर्टल पर इन्होंने नहीं दिखाया। इन्होंने राजकीय सेवा नियमावली का उल्लघंन करके अपने सगे भाई सत्य प्रकाष के नाम पर 2021 में विभाग में ठेकेदारी के लिए पंजीकरण कराया। इनके द्वारा जिस तरह विभागीय सांठगांठ तथा निविदा से जुड़ी अत्यंत गोपनीय जानकारियां उपलब्ध करवाकर दुरुपयोग किया गया और भाई के फर्म प्रकाश टेडर्स के पक्ष में जिस तरह बिलो रेट डलवाकर टेंडर दिलवाया उससे विभाग को आर्थिक क्षति हुई है। एक अन्य शिकायत में इनके बच्चों का विदेश में पढ़ने का ब्यौरा देते हुए कहा गया कि बच्चों की पढ़ाई पर सालाना 50 लाख खर्च होता है। सवाल उठ रहा है, कि जब यह सबकुछ लिखित और साक्ष्य के साथ शिकायत की गई तो क्यों नहीं कार्रवाई हो रही है? क्या इनकी काली कमाई की जानकारी संजय सिंह पगार को नहीं हैं, अगर है, तो क्यों खामोश है? सवाल तो इनपर भी उठ रहे है।
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