सुप्रीम कोर्ट ने कानपुर के मौलवी सैयद शाह काजमी उर्फ मोहम्मद शाद, जो मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग के अवैध धर्मांतरण के आरोपी थे, को जमानत दे दी है। कोर्ट ने यह कहा कि अवैध धर्मांतरण को हत्या, रेप या डकैती जैसे गंभीर अपराधों के समान नहीं माना जा सकता, इसलिए इसमें जमानत दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की 2 जजों की बेंच, जिसमें जस्टिस जे बी पारदीवाला भी शामिल थे, ने हैरानी जताई कि निचली अदालत और हाई कोर्ट ने आरोपी को जमानत क्यों नहीं दी। बेंच ने कहा कि हर साल सेमिनार होते हैं, जिनमें जजों को जमानत के मामलों में विवेकपूर्ण निर्णय लेने की सलाह दी जाती है, फिर भी जज अपने विवेक से निर्णय लेते हैं। बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि यदि निचली अदालत ने जमानत नहीं दी, तो कम से कम हाई कोर्ट को उम्मीद की जाती थी कि वह ऐसा करता।
- Loading weather...
- |
- Last Update 26 Sep, 11:22 PM
- |
- |
- खबरें हटके
- |
- ताज़ा खबर
- |
- क्राइम
- |
- वायरल विडिओ
- |
- वीडियो
- |
- + More
0 Comment