हापुड़, थाना बाबूगढ़ क्षेत्र के ग्राम शाहपुर जट्ट निवासी मजदूर धर्मपाल सिंह (47) की 28-29 जनवरी की रात्रि में हुई संदिग्ध हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे हैं। आजाद अधिकार सेना की शिकायत पर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान ले लिया है और एसपी हापुड़ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने बताया कि धर्मपाल ने मृत्यु से दो दिन पहले (27 जनवरी) थाने में लिखित शि-ाकायत दर्ज कराई थी, जिसमें जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की म गुजारिश की गई थी। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। घटना रात को मृतक ने पुत्री पायल को फोन कर बताया कि कुछ लोग भाले-डंडों से पीट रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इसके बाद फोन बंद हो गया 129 जनवरी को उपेड़ा गांव के आम के बाग में उनका शव पेड़ से लटका मिला।
परिजनों का दावा है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित हत्या है। तीन नामजद आरोपियों (सोनू, वीरेंद्र, कपिल) के खिलाफ हत्या की तहरीर दी गई, लेकिन पुलिस ने धारा 302 आईपीसी के बजाय हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। अब तक सिर्फ एक आरोपी गिरफ्तार हुआ है, बाकी फरार हैं। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई। आजाद अधिकार सेना के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कार्यकताओं के साथ दुर्व्यवहार,
गाली-गलौज और धमकी के भी आरोप हैं। संगठन की शिकायत (केस संख्या 1717/24/77/2026) पर आयोग के सदस्य ब्रज भूषण ने 2 फरवरी को आदेश जारी किया। इसमें एसपी हापुड़ को शिकायतकर्ता को कॉपी देकर 23 फरवरी तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है, वरना आयोग आगे कार्रवाई करेगा। आजाद अधिकार सेना की प्रमुख मांगेंःहत्या का मुकदमा दर्ज कर सभी आरोपी गिरफ्तार हों। एसआ-ईटी से स्वतंत्र जांच, जिसमें कॉल डिटेल, फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट शामिल हों। थाना प्रभारी व पुलिस अधिकारियों की लापरवाही की जांच और कार्रवाई। पीड़ित परिवार (पत्नी अंजू देवी व 6 बच्चे) को सुरक्षा, मुआवजा और न्याय। कार्यकताओं के साथ दुर्व्यवहार की जांच। संगठन ने चेतावनी दी है कि न्याय न मिला तो व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। पुलिस ने अभी टिप्पणी नहीं दी है।
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