बस्ती। किसान नेता एवं सामाजिक चिंतक चंद्रेश प्रताप सिंह ने कहा कि भारत में तीन न्यायाधीश माने जाते हैं। पहला कोर्ट का न्यायाधीश जो अपराध पर फैसला देता है। दूसरा,  घर का बड़ा जो परिवार को जोड़ कर रखता है। तीसरा, भारत का चुनाव आयोग जो लोकतंत्र को जिंदा रखता है। कहा कि जब जनता वोट डालने जाती है तो वह किसी पार्टी पर नहीं, चुनाव आयोग पर भरोसा करके जाती है। उसे लगता है कि मेरा एक वोट गिना जाएगा, मेरी आवाज सुनी जाएगी। यही भरोसा भारत को भारत बनाता है। आज उस भरोसे पर कुछ धुंध सी आ रही है। श्री सिंह ने कहा कि रोज प्याज के छिलके की तरह एक नई खबर निकलती है। कभी वोटर लिस्ट का सवाल, कभी मशीन का सवाल, कभी किसी नेता का बयान। छिलका निकलता है, आंखों में जलन होती है, पर जनता की आंखें दुखने लगती हैं। जनता सड़क पर लड़ना नहीं चाहती, वह चाहती है कि उसकी लड़ाई वोट से खत्म हो जाए। उन्होंने कहा कि पशुओं को हांक कर ले जाया जाता है, इंसानों को समझा कर। भारत की जनता समझदार है, उसे बस सच चाहिए। चुनाव आयोग किसी सरकार का विभाग नहीं है, वह संविधान का बेटा है। उसे इसलिए आजाद रखा गया था ताकि वह राजा से भी सवाल पूछ सके। साफ बोलना अगर कोई सवाल है तो छिपाना नहीं, बताना। सबको एक आंख से देखना चाहे सत्ता हो या विपक्ष, नियम सबके लिए एक। दरवाजा हमेशा खुला रखना जनता जब पूछे, जवाब मिले। कहा कि चुनाव आयोग ने टी.एन. शेषन के समय में दिखाया था कि कैसे एक आदमी पूरी मशीन को ईमानदार बना सकता है। आज फिर उसी शेषन की जरूरत है। जनता ने आपको अपनी तकदीर सौंपी है, इस तकदीर को प्याज के छिलकों में मत उलझने दीजिए। क्योंकि जब चुनाव आयोग पर से भरोसा उठता है, तो वोट नहीं, देश हारता है।