श्री राम के आदर्शो पर चलने का संकल्प लेकर, हो रहे अमर्यादित काम

ओमप्रकाश गौतम
 गढ़मुक्तेश्वर: राजा दशरथ के घर में जन्म लेकर राम को मां कैकई को दिए वचन पर राजा दशरथ ने 14 साल का वन वास दिया तो एक अच्छे पुत्र के रूप में राजघराना छोड़कर वन को चले तो एक अच्छी पत्नी सीता ने अपना धर्म निभाते हुए साथ चली वहीं एक अच्छे भाई के रूप में लक्ष्मण भी साथ निभाने जंगलो कि खाक खाने पर भाई प्रेम को निभाया। वन ने बानर, और आदिवासियों को अपना मित्र बनाकर एक अच्छे मित्र बने। सीता का अपहरण किए जाने के बाद राजा रावण का वध किया तो दुश्मन भी अच्छे बने। राम लीला के मंचन में उपस्थित जन समूह को श्री राम से रामचंद्र से मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने रावण के भाई विभीषण को राजपाठ सौंपा जो सत्य के मार्ग और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया। समिति अध्यक्ष धनवंत जैन,सौरभ जैन,विष्णु दत्त नागर,महामंत्री नितिन जैन,कोषाध्यक्ष अमित गौतम,पूर्व अध्यक्ष पंडित रूपेश शर्मा,रुचिर गुप्ता,नीरज शर्मा,संजीव शर्मा,ने समाज में दस अवगुणों को दूर करने और श्री राम के आदर्शो पर चलने का संकल्प कराया।