बस्ती। आप लोगों ने बहुत कम सुना होगा कि भाजपा का एमएलसी अपनी ही पार्टी के षिक्षक एमएलसी को हराने के लिए जंग छेड़ दी है, यह जंग मिले अपमान के बदले छेड़ी गई है। भाजपा के लोग सत्ता के नशे में इतने चूर हो गए हैं, कि भरी बैठक में अपने ही नेता को अपमानित करने लगे। सवाल उठ रहा है, कि आखिर भाजपा वाले चाहते क्या हैं? क्यों यह लोग अपनी कब्र खोदने में लगे हुए है। क्या इन्हें नहीं मालूम कि एक जनप्रतिनिधि को अपमानित करना भाजपा को कितना को कितना खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। चुनाव के समय लोग अपनों को सहेजते हैं, ताकि पार्टी कमजोर न हो और उसके प्रत्याशी की हार न हो, ऐसा लगता है, कि मानो भाजपा 2027 का चुनाव जीतना ही नहीं चाहती। अगर भाजपा के नेता एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह का बैठक में अपमान करेगें तो उसका खामियाजा भाजपा को तो भुगतना ही पड़ेगा।
अगर किसी नेता को अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़नी हो तो और पीड़ितों का हीरो बनना हो तो वह एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह की तरह बन सकता है। सत्ता में रहकर और सत्ता के गलत नीतियों का विरोध करने की हिम्मत सिर्फ और सिर्फ डीपी सिंह में ही देखने को मिलती है। सूबे के मुखिया को आंख दिखाने की हिम्मत डीपी सिंह के आलावा अन्य नेताओं में नहीं दिखाई देता, जो व्यक्ति प्रदेश के मुखिया से आंख में आंख मिला कर बात करे और उनके खिलाफ उन्हीं के जनपद में धरना प्रदर्शन करके ललकारे उसे देवेंद्र प्रताप सिंह कहते है। इस नेता ने शिक्षक हितों के लिए सड़क से लेकर सदन तक सबसे अधिक लड़ाई लड़ी। जिस नेता ने कभी सम्मान के साथ समझौता नहीं किया, और जिसने लोगों को सिर उठाकर चलना सिखाया, अगर उस नेता को योगीजी के कार्यक्रम में अपमानित होना पड़े तो वह कैसे इसे सहन कर सकते है? जिस नेता को आम जनता और पीड़ितों का आर्षीवाद प्राप्त हो वह कैसे किसी का कृपा पात्र बन सकता है? आज जब भी किसी नेता के बहादुरी और ईमानदारी की बात होती है, तो उसमें पहला नाम डीपी सिंह का ही आता है। इनके दरवाजे से आज तक कोई पीड़ित व्यक्ति खाली हाथ नहीं गया, इसी लिए जब पीड़ित को किसी नेता से न्याय नहीं मिलता तो वह सीधे इनके पास आता है। इनके जनता दरबार में ठेकेदारों की नहीं बल्कि पीड़ितों की भीड़ रहती है। जो नेता षिक्षक और प्रतियोगी नौजवान को अपने परिवार का हिस्सा मानकर उनके हितों की लड़ाई लड़ता हो, उसे किसी और के साथ की क्या आवष्यकता? जिस व्यक्ति ने कभी किसी को अपमानित न किया हो, अगर उसे गंभीर प्रेरक्षा गृह गोरखपुर में शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर योगीजी की मौजूदगी में हो रहे बैठक में विनोद राय के द्वारा यहा जाए कि आप की जगह मंच पर नहीं, नीचे बैठने को कहकर अपमानित किया जाएगा तो वह व्यक्ति कभी भी अपने अपमान को बर्दास्त नहीं करेगा, उसी अपमान का नतीजा रहा है, कि इन्होंने संजयन त्रिपाठी को समर्थन देने की घोषणा कर दी, यह वही संजयन त्रिपाठी हैं, जिन्हें भाजपा ने टिकट न देकर एक तरह अपमानित किया था। संजयन त्रिपाठी का समर्थन करना चुनाव परिणाम को प्रभावित करने जैसा माना जा रहा है। कहा जा रहा है, कि अगर नेताजी और उनकी जांबाज टीम ने एमएलसी शिक्षक चुनाव में अपनी ताकत दिखा दी तो त्रिपाठीजी का एमएलसी बनने का सपना पूरा हो सकता है। नेताजी ने जिस तरह षिक्षकों और प्रतियोगी नौजवानों से त्रिपाठीजी को जीताने की अपील की हैं, उससे भाजपा को शिक्षक एमएलसी चुनाव में जोर का झटका धीरे से लग सकता है। अब आप लोग जरा अंदाजा लगाइए कि प्रदेष में ऐसे कितने भाजपा के सिटिगं एमएलसी या एमएलए हैं, जो इतना साहसिक निर्णय लेने की क्षमता रखतो, यह निर्णय वही व्यक्ति ले सकता है, जिसे न तो खोने का और न पाने का डर हो। जो व्यक्ति अपने और अपने समर्थकों एवं शिक्षक एवं प्रतियोगी नौजवानों के दम पर रिकार्ड मतों से जीतता आ रहा हो, उसके लिए न तो सपा और न भाजपा कोई मायने नहीं रखता। जो इन्होंने षिक्षकों और प्रतियोगी नौजवानों से संजयन त्रिपाठी को जीताने की मार्मिक अपील की है, उससे भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। 2027 के चुनाव से पहले अगर भाजपा शिक्षक एमएलसी सीट को गवां देती है, तो इसका प्रभाव विधानसभा चुनाव में पड़ सकता है। कहा भी जाता है, कि अगर नेताजी जैसे दो चार और नेता हो जाए तो बड़े नेताओं को उनकी गलती का एहसास करा सकते है, उन्हें सम्मान करना सीखा सकते है। 12 अक्टूबर का यह अपमान भाजपा के लिए कितना भारी पड़ सकता है, इसका प्रभाव 23 को होने वाले चुनाव में देखा जा सकता है।
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