रुधौली/बस्ती। जब एक डिप्टी सीएमओ अपने नर्सिगं होम से अपने मेडिकल स्टोर की दुकान से एक्सपायरी दवाएं मरीजों को लिखेगें तो मरीज की हिफाजत कैसे होगी? चूंकि आज भी ग्रामीण क्षेत्र के मरीज डाक्टर्स को भगवान मानते हैं, और विष्वास करते हैं, कि डाक्टर साहब कभी उनके साथ धोखा नहीं देगें, अगर यही एक्सपायरी दवा र्नािगं होम के बाहर किसी अन्य मेडिकल से दी जाती तो माना जाता कि इसमें डिप्टी सीएमओ की कोई गलती नहीं हैं, लेकिन जब डिप्टी सीएमओ अपने ही मेडिकल स्टोर से एक्सपायरी उवांए लिख और दिलवा रहे हैं, तो यहां पर डिप्टी सीएमओ की गलती मानी जाएगी। नगर पंचायत रुधौली में स्थित एक कथित अवैध नर्सिंग होम से जुड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां इलाज कराने पहुंचे मरीज को एक्सपायरी दवा दी गई। इस मामले में जनपद में तैनात एक डिप्टी सीएमओ की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही का है। लोग अपनी बीमारी का इलाज कराने और जीवन बचाने की उम्मीद में डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी मरीज को एक्सपायरी दवा दी जाती है तो यह गंभीर लापरवाही का विषय है। दवा की गुणवत्ता, उसकी वैधता और मरीज को दी जाने वाली दवाओं की जांच स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, मरीज के इलाज के दौरान दवा दिए जाने को लेकर सवाल उठाए गए। जब मरीज के अभिभावक ने एक्सपायरी दवा देने की शिकायत की तो शुरुआत में इस आरोप को मानने से इनकार किया गया। इसके बाद व्हाट्सएप पर जानकारी भेजने को कहा गया और फिर दवा वापस करने की बात कही गई। अब इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इलाज के दौरान कुछ भुगतान ऑनलाइन यशोदा मेडिकल स्टोर के नाम पर किया गया, जबकि कुछ पैसे ऑफलाइन भी दिए गए। ऐसे में भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड, दवाओं की खरीद-बिक्री और मरीज के इलाज के दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। मामले के साथ ही जनपद में स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों की लंबे समय से तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि करीब 15 से 18 वर्षों से जनपद में तैनात अधिकारियों के मामलों में स्थानांतरण नीति का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। इसके अलावा, विभिन्न स्थानों पर कथित अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। इन शिकायतों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके। पत्रकार एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल सिंह ने भी उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात कर संबंधित मामले की जांच कराने और स्थानांतरण नीति के पालन का मुद्दा उठाया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई है, यह स्पष्ट होना बाकी है। अब सवाल यह है कि रुधौली स्थित नर्सिंग होम के संचालन की वैधता की जांच कब होगी? यदि एक्सपायरी दवा देने का आरोप सही पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी? यशोदा मेडिकल स्टोर के नाम पर हुए ऑनलाइन भुगतान और ऑफलाइन लेनदेन की जांच कौन करेगा? साथ ही, लंबे समय से जनपद में तैनात संबंधित अधिकारियों के संबंध में स्थानांतरण नीति का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? मांग है कि स्वास्थ्य विभाग मामले का संज्ञान लेकर नर्सिंग होम के पंजीकरण, संचालन की वैधता, दवाओं के स्टॉक, एक्सपायरी दवाओं के रिकॉर्ड, भुगतान संबंधी साक्ष्यों और संबंधित अधिकारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराए। जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का भरोसा कायम रहे।