बस्ती। आप लोगों को सुनकर हैरानी होगी कि साउंघाट विकास खंड के ग्राम पंचायत सोनहटी बुजुर्ग की प्रधान हसीना बानो अपने चार बच्चों से मनरेगा मजदूर बनाकर मजदूरी करवा रही है, इसी मजदूरी से प्रधान के घर का खर्चा चलता है, जबकि प्रधान के पति उसी गांव में कोटेदार भी है। जो कोटेदार गांव के सैकड़ों गरीबों को भोजन करवा रहा हो, अगर उसके बच्चे मजदूरी करे तो बात समझ में नहीं आती। प्रधान ने बच्चों को या तो फर्जी मनरेगा मजदूर बनाया या फिर वाकई प्रधान का परिवार इतना गरीब हैं, कि उनके परिवार का खर्चा बच्चों की मजदूरी से चलता है। हसीना बनो पहली ऐसी करोड़पति प्रधान होगी, जो अपने बच्चों को मनरेगा मजदूर बनाकर मजदूरी करवा रही है। खासबात यह है, कि इनके बच्चों को मनरेगा में सबसे अधिक काम करने का मौका दिया गया, यानि 100 दिन से अधिक का रोजगार बिना मांगे दिया गया, चूंकि खुद प्रधान हैं, और पति कोटेदार इस लिए इन्हें अपने बच्चों को नियम विरुद्व मनरेगा मलदूर बनाने में कोई दिक्क्त नहीं हुई, रही बात बीडीओ, सचिव, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की तो यह सभी लोग सरकार के नहीं बल्कि प्रधान के नौकर है। हसीना बानो जैसे भ्रष्ट प्रधानों के चलते जिले में मनरेगा का यह हाल है। ग्राम पंचायत से लेकर क्षेत्र पंचायत और विकास भवन तक के लोगों को इस बात की चिंता नहीं रहती कि प्रधान मनरेगा का उुरुपयोग कर रहे है, यह जानते हुए भी कि प्रधान के परिवार को कोई भी सदस्य मनरेगा मजदूर नहीं बन सकता, फिर बीडीओ ने बनाया, इस लिए बनाया ताकि मनरेगा लूट में हिस्सेदारी मिल सके। रही बात विकास भवन और डीसी मनरेगा कि तो इन्हंे भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि मनरेगा के धन का दुरुपयोग हो रहा है, शिकायतें की जाती है, मगर शिकायतों का निस्तारण करने के बजाए जांच के नाम पर सौदा कर लिया जाता है। जब तक जिले में भ्रष्ट लोग रहेगें मनरेगा सुरक्षित नहीं रहेगा, खासतौर पर सोनहटी बुजुर्ग के प्रधान और बीडीओ। मनरेगा जाब कार्ड में प्रधान हसीना बानो का बेटा सदाम हुसैन, बेटी सूफिया खातून, जिसकी शादी हुए लगभग दस साल हो गए, और इसके दो बच्चे हैं, और यह अपने ससुराल में बच्चों के साथ रहती है, फिर इसके नाम से एक नहीं इो नहीं बल्कि सैकड़ों मस्टरोल निकल गए। 31 मई 26 को 16-16 मस्टरोल फर्जी तरीके से निकाले गए, आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं, चह रोजगार सेवक जिम्मेदार जो हाजीरी लगाता, या फिर वह तकनीकी सहायक जिम्मेदार जो फर्जी एमबी बनाता, या फिर बीडीओ साहब और सचिव जिम्मेदार हैं, जिनके डांगल से भुगतान होता। प्रधान के रुबैदा खातून, अफजल हुसैन और बाबी खातून तो पुत्र और पुत्री है, के नाम से भी लगातार फर्जी मस्टरोल निकल रहा है। चूंकि यह लोग ठहरे प्रधान के बेटे और बेटी, इस लिए इन लोगों से फावड़ा भी नहीं चलवाया जाता। तब बिना फावड़ा चलाए हाजीरी लग जा रहा है, और भुगतान हो जा रहा है, तो फावड़ा चलाने की क्या आवष्यकता।